फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ताजमहल में अब मकबरे के बुर्ज से गिरा पत्थर

Thu, 07 May 2015 02:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन
 10 दिन पहले भूकंप के झटकों के दौरान ताजमहल के मुख्य प्रवेश द्वार से पत्थर टूटकर गिरे तो अब पूर्वी गेट पर शाहजहां की बेगम के मकबरे पर हादसा हुआ। भूकंप के झटकों के बाद ताजमहल शायद कमजोर हुआ है। बुधवार सुबह सरहिंदी बेगम मकबरे के बुर्ज से रेड सैंड स्टोन का बड़ा हिस्सा अचानक गिर पड़ा। इससे हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि सुरक्षा जांच कतार में एकदम ठीक नीचे कोई सैलानी नहीं था। महज चार साल पहले ही इस मकबरे की मरम्मत 25 लाख रुपये में कराई गई थी। एएसआई अधिकारी अब यह कहते हुए बच रहे हैं कि बंदरों के उत्पात के चलते शायद पत्थर गिरा है। फिलहाल जांच कराई जाएगी, इसके बाद ही पता चलेगा कि पत्थर कैसे टूटकर गिरा।
विज्ञापन

मकबरे में बने सीआईएसएफ कंट्रोल रूम परिसर में बुर्ज के छज्जे से जिस समय लाल पत्थर गिरा, उस समय नीचे कोई सैलानी नहीं था। एएसआई अधिकारियों को सूचना मिली तो हड़कंप मच गया। हाल में ही संसदीय समिति ने ताजमहल के संरक्षण पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद एएसआई महानिदेशक सहित कई अधिकारियों ने ताज का दौरा किया था। जिस बुर्ज का पत्थर गिरा है, उस मकबरे का 2011 में 25 लाख रुपये से संरक्षण कराया गया था।

वीक एंड होता तो होते कई घायल
ताज देखने के लिए वीकएंड पर 35 से 40 हजार सैलानी उमड़ते हैं, लेकिन पहले तीन दिन यानी सोमवार, मंगलवार और बुधवार को महज 12 से 15 हजार पर्यटक ही आते हैं। बुधवार को लू के प्रकोप के चलते सैलानी भी कम थे, इस वजह से सुरक्षा जांच कतार में कोई पर्यटक नहीं था। जहां पत्थर गिरा वहां अक्सर सैलानी सुरक्षा कतार में होते हैं। रविवार को पत्थर गिरता तो कई सैलानी घायल हो जाते।
विज्ञापन


शाहजहांनी चूने की जगह सीमेंट, रेत
मुगलिया दौर में रेड सैंड स्टोन और मार्बल से बनाई गई इमारतों के मजबूत जोड़ के पीछे शाहजहांनी चूना था। एक दशक पहले तक एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) चूने का प्रयोग ही करता था, लेकिन अब सीमेंट में ही लाल रंग मिलाकर धरोहरों का संरक्षण किया जा रहा है। यहां तक कि लाइम प्लास्टर की जगह एएसआई अधिकारी ही व्हाइट पुट्टी का प्रयोग करवा रहे हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें