किसी पुराने किले में जितने रहस्य होंगे, उससे कहीं ज्यादा रहस्य 181 करोड़ रुपये के ताजगंज प्रोजेक्ट में हैं। ताजमहल के पास सौंदर्यीकरण के लिए बनाए गए ताजगंज प्रोजेक्ट को इस कदर रहस्यमयी बना दिया गया है कि यह दूसरा कॉरीडोर सा लगने लगा है। करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट में हर सप्ताह योजना से जुड़ी चीजें बदल रही हैं। जिस तरह ताज हेरिटेज कारीडोर को बेहद गुपचुप अंदाज में रखा गया, ठीक उसी तरह से ताजगंज प्रोजेक्ट में कौन से काम होंगे, यह रहस्य है। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के नाम पर ताजगंज प्रोजेक्ट में भी पर्यावरण नियमों की धज्जियां उसी तरह से उड़ाई जा रही हैं, जैसे कॉरीडोर के निर्माण में इनकी अनदेखी की गई थी।
विकास योजनाओं के इतिहास में ताजगंज प्रोजेक्ट पहली ऐसी योजना है, जिसमें डीपीआर के मुताबिक काम का नहीं है। कब कौन से काम होने हैं, इसका ब्योरा न अफसरों को पता है और न ही निर्माण एजेंसी को। हैरत ये है कि ताजगंज प्रोजेक्ट पर जिस एएनबी कंपनी के आर्किटेक्ट आशीष श्रीवास्तव ने काम किया, अब उन्हें हटाकर नोएडा के सौरभ गुप्ता आ गए हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को दिखाने के लिए 100 मीटर तक मॉडल तैयार किया गया, उसमें भी तब्दीलियां हुई हैं। कास्ट आयरन के पोल की जगह अब सैड़ स्टोन के लैंप पोस्ट तैयार हो रहे हैं, जबकि सीटें भी बदली गई हैं।
कमेटी की रिपोर्ट झुठला दी
ताजगंज प्रोजेक्ट में वन विभाग की जमीन पर नाला बनाने और पाथवे निर्माण के दौरान हरे पेड़ काटने के आरोपों पर 7 फरवरी को सीईसी टीम ने दौरा किया था। तब कमेटी ने कहा कि फारेस्ट कंजरवेशन एक्ट 1980 का विभागों ने उल्लंघन किया है। काफी संख्या में पेड़ों को काटा गया है और नुकसान पहुंचाया गया है। इस मामले में डीएम पंक ज कुमार और मुख्य वन संरक्षक एके द्विवेदी की जांच टीम ने कमेटी के आरोपों को झुठला दिया। एक मई को डीजी टूरिज्म अमृत अभिजात ने क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी को पत्र लिखकर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। जांच टीम ने नाला निर्माण में कहा कि कुष्ठ आश्रम और वन विभाग की जमीन का चिन्हांकन तय नहीं है, जबकि आगरा कचौरा बाह रोड 3 से 58 मील तक संरक्षित भूमि में है। ताजगंज प्रोजेक्ट में काम 2.4 किमी दूरी पर हो रहा है, जो संरक्षित वन भूमि नहीं है।
अब हॉटमिक्स नहीं, पत्थर की सड़क
आगरा। ताजमहल पूर्वी गेट, पश्चिमी गेट और दक्षिणी गेट पर ताजगंज प्रोजेक्ट के तहत हॉटमिक्स डामर की नहीं, बल्कि पत्थर की सड़क बनाई जाएगी। राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि 15 जून तक ग्रेनाइट स्टोन से सड़क बनाने का मॉडल पूर्वी गेट पर बना लिया जाएगा। अगर यह पसंद आया तो ताजमहल पूर्वी गेट पर शिल्पग्राम तक, पश्चिमी गेट से अमरूद टीला तक और दक्षिणी गेट पर कुत्ता पार्क के क्षेत्र में बनाया जाएगा। अमर विलास होटल के सामने इसका सैंपल बनाने का काम शुरू किया जाएगा। कंक्रीट का बेस तैयार कर ग्रेनाइट से पाथवे की ऊंचाई के बराबर ही सड़क बनाई जाएगी।
कॉरीडोर और ताजगंज प्रोजेक्ट में समानता
ताज हेरिटेज कारीडोर 175 करोड़ रुपये का था, जबकि ताजगंज प्रोजेक्ट 181 करोड़ का। कारीडोर में लखनऊ के अफसर प्लान को छिपाते रहे, ताजगंज प्रोजेक्ट में भी हर दिन बदलते प्लान की जानकारी स्थानीय अफसरों को नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के नाम पर कारीडोर में एनपीसीसी ने पर्यावरण मानकों का उल्लंघन किया। ताजगंज प्रोजेक्ट में भी सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने के बाद ताजगंज में जबरदस्त प्रदूषण, नियमों को धता बताया गया है।
ये होने हैं ताजगंज प्रोजेक्ट में काम
आरसीसी डक्ट
स्टोन लैंप पोस्ट
रेड सेंड स्टोन पाथवे
जन सुविधाएं
टूरिस्ट शेल्टर्स
फेसिलिटी सेंटर
लेंड स्केपिंग
सौंदर्यीकरण
सुरक्षा संबंधी निर्माण