विश्व पर्यटन स्थल पर अलग पहचान रखने वाले ताजमहल के शहर आगरा को आने वाले दिनों में सुलभ और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के लिए भी जाना जाएगा। देश के 98 स्मार्ट शहरों की रेस में आगरा ने भी आखिरी बाधा भी पार कर ली है। प्रदेश सरकार की तरफ से 13 शहरों के नाम भेजे गए थे, इसमें 82.5 अंकों के साथ आगरा प्रदेश में 11वें नंबर पर है। आगरा ने दो स्टेज पार कर ली हैं। अब इंतजार है तो केंद्र सरकार की ओर से उन 20 शहरों की सूची का, जिनको प्रथम चरण में स्मार्ट सिटी बनाया जाना है।
केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के साथ ही शहर में आने वाले दिनों में होने वाले विकास कार्यों की राह जरूर खुल गई है। अगले पांच सालों में केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर लगभग 1000 हजार करोड़ रुपये खर्च करेंगी। इसमें 500 करोड़ रुपये केंद्र के होंगे और इतना ही प्रदेश सरकार के।
ये होंगी स्मार्ट सिटी में सुविधाएं
. निर्बाध विद्युत आपूर्ति
. पर्याप्त स्वच्छ पेयजल आपूर्ति
. स्वास्थ्य और शिक्षा
. सफाई सहित सालिड वेस्ट मैनेजमेंट
. महिलाओं, बच्चों और वृद्ध नागरिकों की सुरक्षा
. सुलभ एवं सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन
. गरीबों के लिए किफायती आवास
. सक्षम आईटी कनेक्टिविटी और डिजिटेलाइजेशन
. ई-गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी
. सुस्थिर पर्यावरण
रेटिंग का ये रहा आधार
नगर निगम की तरफ से केंद्र सरकार ने 15 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। इसमें जनगणना 2011 के आधार पर मुख्य रूप से हाउस होल्ड शौचालयों की स्थिति, शहर में कुल व्ययों में नगर निगमों का अंशदान, पेयजल आपूर्ति, पेयजल पर खर्च, और आय, नगर निगम का बजट, आय के स्रोत (टैक्स वसूली व अन्य), आनलाइन शिकायत और उनका निस्तारण की प्रक्रिया, जेएनएनआरयूएम के तहत रीफार्म की स्थिति है, ई न्यूज लेटर, जेएनएनआरयूएम के तहत जो योजनाएं शहर को मिलीं, पूरी हो चुकी हैं, या कितनी शेष हैं, आदि बिंदुओं पर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी।
किसको कितने मिले अंक
रेटिंग में मुरादाबाद व अलीगढ़ 90-90 अंक, सहारनपुर 87.50, बरेली 86.11, झांसी 85, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद व आगरा 82.50 अंक, रामपुर 78.13, मेरठ व रायबरेली 75-75 अंक, गोरखपुर, आजमगढ़, मथुरा व लखीमपुर 72.50-72.50 अंक, बस्ती व फतेहपुर 67.50 अंक, नवाबगंज 65 अंक, उरई 62.50, फीरोजाबाद व बिजनौर को 60-60 अंक मिले हैं। इसमें टॉप रेटिंग वाले 13 शहरों के नाम स्मार्ट सिटी के रूप में मंजूर करने के लिए भारत सरकार को भेजे गए थे।
प्रदेश में ये नाम हुए फाइनल
मुरादाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर, बरेली, झांसी, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद, आगरा, रामपुर।
क्षेत्र के हिसाब से होंगे विकास कार्य
स्मार्ट सिटी योजना और जवाहर लाल नेहरू अरबन रिन्यूअल मिशन (जेनर्म) में मूल अंतर यह है कि जेनर्म प्रोजेक्ट आधारित योजना थी। इसके तहत पेयजल, सीवर, ड्रेन और सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्रोजेक्ट बनाए गए थे, लेकिन स्मार्ट सिटी एरिया आधारित योजना होगी। इसके तहत कुछ क्षेत्र चयनित किए जाएंगे। इसके तहत ऐतिहासिक इमारत, सड़कें, पार्क, बिजली, सीवर, पेयजल, ड्रेेन, हास्पिटल या स्कूल, उनका विकास किया जाएगा। हरियाली का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
शहर के विकास के हैं तीन मॉडल
- रिट्रोफिटिंग : इसमें विकसित क्षेत्र को नागरिकों के परामर्श से 500 एकड़ से अधिक क्षेत्र चिह्नित कर शहर को स्मार्ट बनाने के लिए कार्यनीति बनाई जाएगी। उसी आधार पर कम से कम समय में क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। इसका फायदा शहर के अन्य क्षेत्रों को भी मिलेगा।
. पुनरविकास: शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) द्वारा नागरिकों के परामर्श से 50 एकड़ से ज्यादा नया क्षेत्र विकसित किया जाएगा। नए ले-आउट से विकसित होने वाले इस क्षेत्र में मिश्रित भू-प्रयोग समेत अन्य सुविधाएं मिलेंगी।
. पैन-सिटी : शहर में किसी एक क्षेत्र को उत्तम बनाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर परिवहन क्षेत्र में (कुशल यातायात प्रबंधन प्रणाली) स्मार्ट तरीके से प्रयोग में लाई जाएगी। इसके तहत यात्रा, समय, लागत में कमी लाई जाएगी, जिसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
रियल एस्टेट में आएगा उछाल
देश के सौ स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल होने से शहर में एक बार फिर रियल एस्टेट कारोबार में उछाल आने की उम्मीद है। आधुनिक और सुलभ सुविधाएं उपलब्ध होने की स्थिति में आसपास के तमाम शहरों के लोग आगरा की रुख करेंगे। इससे मंद पड़े रियल एस्टेट कारोबार को फिर से पंख लगेंगे। न सिर्फ कालोनियां विकसित होंगी, बल्कि मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों की भी डिमांड बढ़ेगी।