उत्तर प्रदेश के आगरा में जगनेर कांड में महिला की खुदकुशी के बाद थाने में फिरौती के लिए अपहरण, मारपीट, जान से मारने की धमकी और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने की धारा में केस दर्ज किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए चार बार तहरीर फाड़ी गई। जिस तहरीर पर केस दर्ज किया गया, उसमें चौकी पर मारपीट, वर्दीधारियों की ओर से अपहरण करने की बात का जिक्र तक नहीं है। जबकि पीड़ित के वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों पर आरोप हैं।
मनोज शर्मा की तहरीर के आधार पर केस दर्ज
मामला जगनेर थाना क्षेत्र के नौनी गांव का है। परिजन का आरोप है कि गांव निवासी मनोज शर्मा को अवैध हिरासत में रखकर थर्ड डिग्री दी गई थी। पति के एनकाउंटर की सूचना पर पत्नी अनीता शर्मा ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। इस मामले में आनन-फानन एक दरोगा और तीन सिपाही निलंबित किए गए। पुलिस ने मनोज शर्मा की तहरीर के आधार पर केस दर्ज किया। मुकदमे में रवि पचौरी और काकी परमार नामजद हैं। तीन-चार अज्ञात लोगों का जिक्र है।
केस जिस तहरीर पर लिखा गया उसमें पुलिस के ऊपर कोई आरोप नहीं है। लिखा गया है कि अपहरण करने वाले खुद को पुलिसकर्मी बता रहे थे, जबकि सोशल मीडिया पर मनोज के वायरल वीडियो में आरोप अलग हैं। उसमें आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने ही प्राइवेट कार से अपहरण किया था। चौकी में बंधक बनाकर पीटा। मनोज ने शुरू में दी तहरीर में यही आरोप लगाए थे।
निलंबित क्यों किए दरोगा और सिपाही
महिला की खुदकुशी के बाद एसीपी खेरागढ़ की रिपोर्ट के आधार पर दरोगा इजहार अहमद, सिपाही सागर चौधरी, नीरज कुमार, कुलदीप कुमार को निलंबित किया गया। सवाल यह उठ रहा है कि जब केस में पुलिस पर कोई आरोप ही नहीं है तो उन्हें निलंबित क्यों किया गया। यदि घटना उनके कारण हुई तो उन्हें केस में क्यों नहीं लाया गया।
आरपीएफ दरोगा और सिपाही गए थे जेल
जब पुलिस किसी अपराध में फंसती है तो नियम बदल जाते हैं। पुलिस की बदनामी सोचकर अधिकारी घटना पर पर्दा डालने में जुट जाते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ। इसके विपरीत जब मामला दूसरे विभाग से संबंधित होता है तो पुलिस सख्त हो जाती है। कायदे कानून की बात करती है। दिसंबर में मलपुरा थाने से आरपीएफ दरोगा सुरेश चौधरी, आरक्षी पारूल यादव, नीरज सिंह को फिरौती के लिए अपहरण के आरोप में जेल भेजा गया था। उन्होंने भी कुछ ऐसा ही किया था। प्राइवेट गाड़ी से मलपुरा से जीजा-साले का अपहरण किया था। छोड़ने के एवज में चार लाख रुपये मांग रहे थे।
पुलिस के कारण दो महिलाएं कर चुकीं खुदकुशी
पुलिस पर तीन महीने में दो महिलाओं की खुदकुशी कर लेने का आरोप है। खंदौली में छेड़छाड़ पीड़िता को दो बार थाने से भगाया गया था। शांतिभंग में चालान की धमकी दी गई थी। उसने फांसी लगा ली। खंदौली के बाद अब जगनेर में घटना हुई। हिरासत में पति को थर्ड डिग्री दी गई। पत्नी को पति की मौत की झूठी खबर मिली। उसने जहर खाकर जान दे दी।
खंदौली के गांव नगला मट्टू में 23 दिसंबर को 28 वर्षीय सरिता देवी ने फांसी लगाई थी। पीड़िता को थाने से दरोगा अर्जुन सिंह ने भगाया था। अधिकारियों ने खुदकुशी जैसे गंभीर मामले में दरोगा को लाइन हाजिर किया। तीन-चार दिन दरोगा के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी। पुलिस आयुक्त ने उसे निलंबित कर दिया।
दरोगा और तीन सिपाही एक रात में कमाना चाहते थे दो लाख
जगनेर में तो पूरी घटना ही पुलिस की अवैध वसूली के कारण होने का आरोप है। दरोगा और तीन सिपाही एक रात में दो लाख रुपये कमाना चाहते थे। सट्टे के आरोप में मनोज शर्मा को उठाया। आरोप है कि रवि पचौरी और काकी परमार जगनेर पुलिस के खास हैं। गुर्गे हैं। वसूली कराते हैं। उन्होंने ही मनोज शर्मा को चिन्हित कराया। उसे बहाने से मंदिर के पास बुलाया था। उनके कहने पर पुलिस ने मनोज को सरैंधी चौकी में बेरहमी से पीटा। उसे जेल भेजने की धमकी दी। दो लाख रुपये मांगे।
यही नहीं डराने के लिए मनोज की पत्नी से फोन पर झूठ बोला गया। बताया गया कि उसका पति मर गया। वह यह बर्दाश्त नहीं कर पाई। जहर खा लिया। पुलिसकर्मियों के निलंबन की कार्रवाई हुई। परिजन का आरोप है कि इन्हें बचा लिया गया। केस में उन्हें नामजद नहीं किया गया। दो महिलाओं की खुदकुशी से उत्थान ब्राह्मण महासभा में आक्रोश है। संगठन ने प्रदर्शन की चेतावनी दी है।