स्वाइन फ्लू का वायरस सबसे ज्यादा बच्चों पर हमला कर रहा है। आगरा में इस साल अभी तक 60-65 फीसदी बच्चे इसकी चपेट में आए हैं। इनके परिजनों की जांच में वायरस नहीं मिला। ऐसे में इनके वाहक का पता करने के लिए चिकित्सक केस स्टडी कर रहे हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजी लैब में जनवरी से अब तक 1005 मरीजों के नमूने जांच के लिए आए। इनमें से कुल 212 मरीजों में बीमारी की पुष्टि हुई। इनमें आगरा के 142 मरीज रहे। स्क्रीनिंग में पाया गया कि 85 मरीजों की उम्र दस साल से कम थी।
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इनमें भी पांच साल के बच्चों की संख्या लगभग 36 रही। इनके परिजनों की जांच की तो नौ में ही स्वाइन फ्लू मिला। तीन मरीजों के परिजन ही शहर से बाहर गए हुए थे। लौटने पर बीमार हुए और जांच में स्वाइन फ्लू मिला।
इस सीजन में तीन केस मिले
इस सीजन में तीन केस मिले हैं, यह भी बच्चे ही हैं। इनके परिजनों के भी नमूने लिए, लेकिन कोई भी पॉजिटिव नहीं मिला। ऐसे में बच्चों को वायरस ने कैसे अपनी चपेट में लिया, चिकित्सक भी इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं। सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि वायरस के वाहक की जिला एपीडेमियोलॉजिस्ट की निगरानी में टीम स्टडी कर रही है।
प्रतिरोधक क्षमता कम होने से ज्यादा हो रहे शिकार
एसएन मेडिकल कॉलेज के वायरोलॉजी लैब विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल बताती हैं कि स्वाइन फ्लू के मरीजों में बच्चों की संख्या आधे से ज्यादा है। पिछली केस स्टडी में पाया कि बच्चे को बीमारी मिली, लेकिन परिजनों को नहीं मिली।
बच्चे के पिता ने सर्दी-जुकाम और बुखार की बात कही, लेकिन कुछ दिन बाद वह ठीक हो गए। संभावना है कि पिता की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के कारण वायरस ज्यादा प्रभावी नहीं हुआ, लेकिन संपर्क में आने से बच्चे की हालत बिगड़ गई।
ये सावधानी बरतें
- बच्चों की एक ही रुमाल से नाक-मुंह न पोंछें।
- फोन और टीवी रिमोट कंट्रोल को साफ रखें।
- छींकते-खांसते लोगों से बच्चों को दूर रखें।
- छींकते वक्त रुमाल लगाएं, इसे दूसरों के संपर्क से बचाएं।