ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि कहा कि ताजमहल के 22 कमरे खुलें तो ताजमहल के तेजोमहालय होने पर विश्वास भी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि गाय, गंगा व गीता से सनातन धर्म की पहचान है, हम उसे ही भूलते जा रहे हैं। हर व्यक्ति को गीता पढ़नी चाहिए।
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दयालबाग स्थित गोपालधाम में मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि सनातन संस्कृति तथा वर्णाश्रम धर्ममूलक व्यवस्था करने के लिए गंगा की धारा को अविरल और निर्मल होना चाहिए। भारत में गाय का एक बूंद खून भी जमीन पर नहीं गिरना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को गीता का ज्ञान होना चाहिए। धर्मनिरपेक्ष शासन का अर्थ हिंदू विरोध हो गया है। यह बंद होना चाहिए।
ताजमहल के विवाद पर कहा कि कमरे खुलें तो राज भी खुलेंगे। शंकराचार्य सरस्वती ने प्रथम आगमन पर गुरु दीपिका योगक्षेम फाउंडेशन की ओर से त्रिशूल भेंट किया जाएगा। इस मौके पर वारिजा चतुर्वेदी, रवि उपाध्याय, ओपी शर्मा, अनुज गुप्ता आदि मौजूद रहे।