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नारी शक्ति कुंभ में बोलीं सुषमा- कमजोर नहीं महिलाएं, समाज की मानसिकता बदलने की जरूरत

Sun, 09 Dec 2018 01:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
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एक मंच पर देश की सशक्त महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन के अक्षय पात्र परिसर में नारी शक्ति कुंभ का आयोजन किया गया। इसमें देश की सशक्त महिलाओं ने हिस्सा लिया। दूसरे दिन इस वैचारिक महाकुंभ का शुभारंभ गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने मां सरस्वती की प्रतिमा के आगे दीप प्रज्वलित कर किया।
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रविवार को कार्यक्रम में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन, यूपी की महिला एवं बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, सांसद हेमा मालिनी समेत तमाम महिलाएं शामिल हुईं। 


कार्यक्रम आगरा के डॉ. भीमराव विश्वविद्यालय एवं उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल राम नाईक ने भी शिरकत की। इनका स्वागत विश्वविद्यालय के कुलपति अरविन्द दीक्षित ने किया। 

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'माता ही निर्माता है'

कार्यक्रम में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि हमारे समाज में नारी को अबला व कमजोर समझा गया, जो उसके साथ अन्याय है। महिलाएं हमेशा से ही हर क्षेत्र में आगे रही हैं। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति को समाज की मानसिकता बदलनी होगी। 

सुषमा ने कहा कि हमारे देश में कुटुम्ब व्यवस्था मजबूत थी, लेकिन अब परिवार बिखर रहे हैं। परिवार को एक रखना महिलाओं की जिम्मेदारी है। जिससे कुटुम्ब परंपरा बनी रही। उन्होंने कहा कि माता ही निर्माता है, जो बच्चे को जन्म देती है। उसके व्यक्तित्व का निर्माण भी करती है। 

सुषमा स्वराज ने भ्रूण हत्या को समाज के लिए अभिशाप बताया। कहा कि हमारे समाज में कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजा जाता है। लेकिन विडंबना है कि अगले ही दिन अगर बहू गर्भ से है तो उसके गर्भ की जांच इसलिए होती है कि गर्भ में कन्या तो नहीं। 

उन्होंने कहा कि लिंगानुपात कम हो रहा है। प्रधानमंत्री ने इसका संज्ञान लिया और हरियाणा से इसकी शुरुआत की। हरियाणा में बेटी जन्म पर खुशी नहीं होती थी। इस अभियान के बाद से अब हरियाणा में बेटी का भी कुआं पूजन कर जन्मोत्सव मनाया जाता है।
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तमाम मुद्दों पर हो रहा मंथन

नारी शक्ति कुम्भ का मुख्य उद्देश्य वैदिक मंत्र का आधार है। इस वैचारिक महाकुंभ में नारी विषयक, विषयों पर चर्चा एवं उदबोधन के माध्यम से वर्तमान समय में महिलाओं की चुनौतियां एवं समाधान के लिए मंथन किया गया। 

कार्यक्रम में सामाजिक, आर्थिक, साहित्य, कला, रक्षा, विज्ञान, शिक्षा, खेल, चिकित्सा और राजनैतिक क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली लगभग चार हजार महिलाओं ने हिस्सा लिया। 
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