UP: एसएन मेडिकल काॅलेज में रोबोट से होगी सर्जरी, अमेरिका-जर्मनी से खरीदे जाएंगे; जानें कब से मिलेगी सुविधा
Sun, 05 Jul 2026 05:29 PM IST
Arun Parashar
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
सार
25 करोड़ रुपये की लागत वाले रोबोट अमेरिका-जर्मनी निर्मित होंगे। इससे हड्डी रोग, पेट रोग, बाल रोग, ईएनटी रोग के जटिल ऑपरेशन हो सकेंगे। रोबोट के संचालन के लिए सर्जंस को एम्स में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में भी जल्द ही एम्स जैसी चिकित्सकीय सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए तीन रोबोट की खरीद की जा रही है। एक रोबोट शासन उपलब्ध कराएगा और दो मेडिकल कॉलेज के स्तर से खरीदे जाएंगे। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। ये रोबोट जर्मनी और अमेरिका निर्मित होंगे। इसके लिए प्रजेंटेशन भी हो गया है। 2027 में रोबोट मिलने की उम्मीद है।
इंटीग्रेटेड प्लान के तहत एसएन में 1200 करोड़ रुपये से एम्स जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एक रोबोट की कीमत करीब 25 करोड़ रुपये है। रोबोट की खरीद के लिए शासन ने टास्क फोर्स भी बना दी है। अमेरिका-जर्मनी की कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ लखनऊ में प्रजेंटेशन भी हो गया है। शासन से एक रोबोट मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज दो और की खरीद करेगा।
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प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि शासन स्तर से एसएन समेत छह मेडिकल कॉलेजों को एक-एक रोबोट दिया जाएगा। 25 करोड़ रुपये की लागत वाले रोबोट अमेरिका-जर्मनी निर्मित होंगे। इससे हड्डी रोग, पेट रोग, बाल रोग, ईएनटी रोग के जटिल ऑपरेशन हो सकेंगे। रोबोट के संचालन के लिए सर्जंस को एम्स में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
हर महीने 3700 मरीजों के हो रहे ऑपरेशन
प्राचार्य ने बताया कि एसएन में हर महीने करीब 3700 मरीजों के छोटे-बड़े ऑपरेशन हो रहे हैं। हर महीने 90 हजार मरीज ओपीडी में इलाज करा रहे हैं। साढ़े पांच हजार मरीज भर्ती हो रहे हैं। रोबोट से बेहद जटिल और गंभीर रोगों की ही सर्जरी की जाएगी। इससे आगरा के आसपास के जिलों के मरीजों को भी लाभ मिलेगा।
एआई आधारित सीटी-स्कैन और एमआरआई मशीन की होगी खरीद
इंटीग्रेटेड प्लान के तहत रेडियो डायग्नोस्टिक विभाग के लिए 10 मंजिला इमारत बनेगी। इसमें एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई समेत अन्य सुविधाएं होंगी। इसके लिए एआई आधारित सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनें लगाई जाएंगी। इससे जटिल बीमारियों को आसानी से चिह्नित किया जा सकेगा। प्राचार्य ने बताया कि इसका प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया गया है।
संक्रमण का खतरा कम, 360 डिग्री पर सर्जरी
सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी में पारंपरिक ओपन सर्जरी-लेप्रोस्कोपी के मुकाबले कम चीर-फाड़ करनी पड़ेगी। इससे रक्तस्राव-दर्द कम होगा। थ्रीडी हाई-डेफिनेशन दृश्य से अंदर के भाग जूम कर स्पष्ट देख सकते हैं। रोबोट मानव कलाई के मुकाबले 360 डिग्री में घूम सकते हैं। इससे संकीर्ण-जटिल स्थानों पर भी आसानी से सर्जरी हो सकेगी। सर्जंस रोबोट को नियंत्रण करते हैं, इससे संक्रमण से बचाव होता है।