केंद्र से परीक्षा देकर बाहर आते अभ्यर्थी।
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के तीसरे दिन शनिवार को शिक्षा के प्रति समर्पण की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। जिले में आयोजित परीक्षा के लिए 11,489 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की रही, जो पहले से विद्यालयों में कार्यरत हैं और नई व्यवस्था के तहत टीईटी अनिवार्य होने के कारण परीक्षा में शामिल हुए।
खास बात यह रही कि कई परिवारों में माता-पिता और उनके बेटे-बेटियां एक ही दिन टीईटी के अभ्यर्थी बने, लेकिन परीक्षा केंद्र अलग-अलग जिलों में पड़ने के कारण वे साथ परीक्षा भी नहीं दे सके। कोई पिता अपने केंद्र के लिए दूसरे जिले रवाना हुआ तो बेटा या बेटी किसी अन्य जिले के केंद्र पर परीक्षा देने पहुंचे। परिवार में पूरे दिन परीक्षा और सफर दोनों की चर्चा रही।
25 साल पढ़ाने वाले शिक्षक, बेटे के साथ बने अभ्यर्थी
उच्च माध्यमिक विद्यालय, भाधूजपुरा में अध्यापन करा हूं। करीब 25 वर्षों से लगातार बच्चों को पढ़ाने के कार्य कर रहा हूं। इस बार मैंने और बेटे दोनों ने टीईटी दी। बेटे का सपना शिक्षक बनना और मेरा शिक्षक पद पर बने रहना है। -सुघर सिंह, शिक्षक