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सूरा तेरे दृग अलबेले, छैल छबिन संग खेले

Fri, 24 Apr 2015 02:05 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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महाकवि सूरदास को उनकी 537वीं जयंती पर गुरुवार को सूरकुटी में भावांजलि दी गई। सूर स्मारक मंडल के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में शहर के कवियों से लेकर वक्ताओं ने सूर के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कवि सोम ठाकुर ने कहा, सूरा तेरे दृग अलबेले, छैल छबिन संग खेले...।
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महाकवि सूरदास नेत्रहीन विद्यालय एवं प्रशिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों ने सूर के पद गाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद भावांजलि समारोह के पहले चरण में वक्ताआें ने अपने विचार रखे। पंडित चंदन लाल पाराशर ने कहा कि आकाश का सूर्य पृथ्वी के अंधकार को और धरती का ‘सूर’ व्यक्ति के अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है। केंद्रीय हिंदी संस्थान के कुलसचिव डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी ने सूरदास से संबंधित चीजों और पुस्तकों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्रीय हिंदी संस्थान सूर स्मारक मंडल के साथ मिलकर इसके लिए काम करेगा। डॉ. देवेंद्र शुक्ल ने सूर स्मारक से जुड़ी तमाम जानकारियां साझा कीं। इस सत्र का संचालन डॉ. मधुरिमा शर्मा ने किया।
दूसरे चरण की शुरुआत डॉ. शशि तिवारी की इस कविता ‘पर्याय थे तुम भक्ति का सूरा तुम्हें प्रणाम... से हुई।’ उन्होंने ‘राधा के नैनन बसे, कृष्णा सदा दिन रैन, सूरा तेरो भाग्य, तू बसो कृष्ण के नैन।’ सुनाया। शिव सागर ने ‘चौदह भुवनों से प्यारा ब्रज धाम, जहां की रानी राधा हैं...’ और शीलेंद्र वशिष्ठ ने ‘मन मंदिर में तेरी मूरत, नैन हिराने ढूंढत-ढूंढत...’ कविता सुनाई। इसके अलावा चौधरी बदन सिंह, डॉ. रामअवतार शर्मा, बिरजू ने भी काव्यपाठ किया। संचालन पंडित रमेश शर्मा ने की। कार्यक्रम में डॉ. विजय लक्ष्मी शर्मा, भुवनेश श्रोतिय, वत्सला प्रभाकर आदि मौजूद रहे।
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‘सबसे ऊंची प्रेम सगाई’
गायक सुधीर नारायण से ‘सबसे ऊंची प्रेम सगाई...’ और ‘चरण कमल बंदौ हरि राई...’ सुनाई। उन्होंने अगले वर्ष से बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव रखा और सभी ने सहयोग का आश्वासन दिया। डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी ने विद्यालय को एक कंप्यूटर उपलब्ध कराने की घोषणा की।

सिफ पक्षी विहार का प्रचार, सूरकुटी ओझल
आम दिनों में कम ही लोग पहुंचते हैं, प्रवेश शुल्क भी एक वजह
आगरा। सूरकुटी में विशेष आयोजन के दौरान ही लोगों की भीड़ रहती है। इस दिन लोगों का प्रवेश नि:शुल्क होता है। साथ ही आमंत्रित लोग भी पहुंचते हैं। वहीं, आम दिनों में गिनेचुने लोग ही सूरकुटी तक पहुंच पाते हैं। प्रवेश शुल्क अधिक होने के साथ प्रचार-प्रसार का अभाव भी इसका कारण है।
कीथम पक्षी विहार में प्रवेश के लिए भारतीयों को 30 और विदेशियों को 350 रुपये देने पड़ते हैं। प्रवेश द्वार से सूर कुटी की दूरी एक किलोमीटर से अधिक है। दुपहिया वाहन ले जाने के लिए 20, कार, जीप का 100 और बस ले जाने के लिए 200 रुपये निर्धारित हैं। जो पर्यटक पक्षी विहार पहुंचते हैं, वह झील, भालू संरक्षण केंद्र देखकर लौट जाते हैं। शहर में साइनेज भी पक्षी विहार के नाम से ही लगे हैं।
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