गोवर्धन के तीन प्रमुख मंदिरों के श्राइन बोर्ड गठन से इनकार कर चुकी योगी सरकार को उच्चतम न्यायालय ने बड़ा झटका दिया है। राज्य सरकार की अपील पर उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में जल्द सुनवाई से साफ इनकार करते पूछा है कि श्राइन बोर्ड बनाने से सरकार को संकोच क्यों है। श्री गिरिराज महाराज गोवर्धन परिक्रमा (पर्वतीय क्षेत्र) संरक्षण को लेकर एनजीटी के सख्त रुख को भांपकर राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय की शरण ली थी।
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सोमवार को राज्य सरकार के अधिवक्ता एडिशनल एडवोकेट जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष इस मामले में जल्द सुनवाई की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि अगर एनजीटी चाहती है तो ब्यूरोक्रेट्स इसमें संकोच क्यों कर रहे हैं। कोर्ट अब इस मामले में 2 अगस्त को सुनवाई करेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जल्द सुनवाई की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर एनजीटी किसी नौकरशाह से बात करना चाहता है, तो उसमें क्या परेशानी है। आखिर नौकरशाह अदालत आने से क्यों कतराते हैं।
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एनजीटी ने दिया था श्राइन बोर्ड गठन का आदेश
एनजीटी
गोवर्धन में गिरिराज पर्वत के संरक्षण संबंधी याचिका पर एनजीटी ने 2015 में श्राइन बोर्ड गठन का आदेश दिया था। इस पर पिछले चार साल से संबंधित अधिकारियों द्वारा शपथ पत्र दिए जा रहे हैं, लेकिन 19 जुलाई को अधिकारियों ने पूरी तरह से हाथ झाड़ लिए।
करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक गोवर्धन स्थित गिरिराज महाराज के संरक्षण को लेकर 2013 में गिरिराजजी महाराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान के बैनरतले आनंद बाबा और सत्यप्रकाश मंगल ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। 2015 में एनजीटी ने परिक्रमा क्षेत्र का जायजा लेने के लिए कोर्ट कमिश्नर भेजे।
उन्होंने 17 बिंदुओं पर काम करने की आवश्यकता जताई थी। इसमें नो व्हीकल, पौधरोपण, निर्माण प्रतिबंधित सहित तीन प्रमुख मंदिरों के लिए श्राइन बोर्ड का गठन भी शामिल था। राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों ने इन सभी बिंदुओं पर काम करने की सहमति जताई।
इसमें श्राइन बोर्ड के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की गई। अधिकारियों ने शपथ पत्र भी दाखिल किए, लेकिन अब सरकार ने इससे मना कर दिया है। इसे याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने कोर्ट को गुमराह करने वाला कदम बताते हुए सख्त फैसला लेने की अपील थी।
तीन प्रमुख मंदिरों से जुड़े हैं डेढ़ हजार परिवार
गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
एनजीटी ने गोवर्धन के मुकुट मुखारबिंद मानसीगंगा मंदिर, श्रीगिरिराजजी महाराज दानघाटी मंदिर और जतीपुरा मुखारबिंद मंदिर के लिए श्राइन बोर्ड गठित करने के आदेश दिए हैं। इन तीनों ही प्रमुख मंदिरों से करीब डेढ़ हजार से ज्यादा परिवार सेवायतों के जुड़े हुए हैं।
इन परिवारों के सदस्य मंदिरों की विभिन्न सेवाओं से जुड़े होने के कारण अपनी आजीविका चलाते हैं। इन परिवारों को मंदिरों से आर्थिक मदद भी मिलती है। अब इन्हें डर है कि श्राइन बोर्ड गठित होने पर यह मदद प्रभावित हो जाएगी।
एनजीटी श्राइन बोर्ड का गठन श्रीगिरिराजजी महाराज दानघाटी मंदिर, मुकुट मुखारबिंद मानसी गंगा मंदिर और और जतीपुरा मुखारबिंद मंदिर के लिए करने की इच्छुक है। यह तीनों मंदिर गोवर्धन परिक्रमा क्षेत्र के प्रमुख मंदिर है। इन तीनों मंदिरों के पास अरबों रुपये की संपत्ति होने का अनुमान है।
इसमें मुकुट मुखारबिंद मानसीगंगा मंदिर के पास 21 करोड़ रुपये नकद हैं तो 17 बीघा जमीन, बगीचा, खास महल अचल संपत्ति के रूप में मौजूद है। दानघाटी मंदिर के पास करीब 70 करोड़ नगद है, जबकि गिरिराज बाग, विद्यालय, कृषि जमीन भी है। जतीपुरा मुखारबिंद मंदिर के पास करीब आठ करोड़ जमा है। संपत्ति भी है।