बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में स्वत: संज्ञान मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने बालू के अवैध खनन करने वाले माफिया के खिलाफ कार्रवाई को कहा। बेंच ने टिप्पणी की कि खनन मामले में 625 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, लेकिन अधिकारी अवैध खनन कार्यों को संचालित करने वाले मुख्य लोगों की पहचान करने में असमर्थ रहे हैं। यह विश्वास करना संभव नहीं है कि 600 गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन वे यह पता लगाने में सक्षम नहीं हैं कि वास्तव में इस पूरे कॉकस को कौन चला रहा है।
न्यायमूर्ति मेहता ने टिप्पणी की कि अधिकारियों को खनन नेटवर्क के पीछे के मुख्य सरगनाओं को पकड़ने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सुनवाई में उन्होंने कहा कि सेंक्चुअरी के पास के गांवों के लोगों को आजीविका के वैकल्पिक स्रोत प्रदान किए जाने चाहिए, ताकि वे अवैध खनन गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर न हों। इसके लिए राज्य सरकार को नीति बनानी होगी।
सुरक्षा उपायों के लिए 65.47 करोड़ का बजट जारी
राजस्थान की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि सेंक्चुअरी में निगरानी के लिए चार स्थायी और सात अस्थायी चौकियां (चेक पोस्ट) स्थापित की गई हैं। यहां एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाने और अभय कमांड सेंटर के निर्माण के लिए 65.47 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। सेंक्चुअरी क्षेत्र में 40 अत्यंत संवेदनशील स्थानों की पहचान की है, जहां यह कैमरे लगाए जाएंगे। खनन गतिविधियों में लगे वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग कराई जाएगी। धौलपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह व्यवस्था लागू हो चुकी है और बाकी जिलों में 31 जुलाई, तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है।