आगरा। देश में जीवनरक्षक दवाओं पर हो रही बेतहाशा मुनाफाखोरी और उनके आसमान छूते दामों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। शहर के चिकित्सक डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने दवाओं की आड़ में हो रही इस खुली लूट पर गहरा आश्चर्य और चिंता व्यक्त की।
डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि उन्होंने अधिवक्ता बनकर अदालत के समक्ष मरीजों के बिल और पुख्ता तथ्य पेश किए। उन्होंने याचिका में कहा है कि ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर जैसे सख्त नियम बनाए जाने के बावजूद कंपनियां धड़ल्ले से मुनाफाखोरी कर रही हैं। इसके तहत रिटेलर का प्रॉफिट मार्जिन अधिकतम 16% तय है, लेकिन कंपनियां और अस्पताल दवाओं को 100% से 150% और कई मामलों में 5 से 10 गुना महंगे दामों पर बेच रहे हैं। खासकर कॉरपोरेट अस्पताल एमआरपी पर दवाओं को बेचकर भारी मुनाफा कमा रहे हैं। अस्पताल में तनाव और पैनिक की स्थिति होने के कारण मरीज के परिजन मनमाने दाम देने को मजबूर हैं। याचिका में उन्होंने कहा कि इसमें डॉक्टरों का कोई हाथ नहीं होता, जबकि अक्सर जनता का गुस्सा डॉक्टरों पर फूटता है। याचिकाकर्ता ने मांग की कि जिस तरह सरकार कृषि उत्पादों और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अन्य चीजों के दामों पर कड़ा नियंत्रण रखती है, उसी तरह दवाओं के दामों की भी सख्त निगरानी होनी चाहिए।
एंटीबायोटिक्स में सबसे ज्यादा मुनाफा
याचिका में एक बेहद चिंताजनक पहलू एंटीबायोटिक्स की अत्यधिक बिक्री और उनके दामों से जुड़ा उठाया गया है। डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने अदालत से कहा कि ज्यादा मुनाफे के चक्कर में इन दवाओं को बाजार में आक्रामक रूप से प्रमोट किया जाता है, जिससे इनका अनावश्यक और अत्यधिक इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे सुपरबग और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ रहा है। डॉ. कुलश्रेष्ठ ने बताया कि याचिका की सुनवाई के लिए वह सुप्रीम कोर्ट जाते समय जंतर-मंतर के आंदोलन में जाम में फंस गए। दौड़ लगाकर अदालत पहुंचे, जहां उनकी दलीलों पर याचिका स्वीकार कर नोटिस जारी किए गए हैं।