सुप्रीम कोर्ट ने आठ जुलाई को 13 उन दोषियों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था, जोकि अपराध के वक्त नाबालिग घोषित किए जा चुके हैं। इनमें से 12 बंदी केंद्रीय जेल आगरा और एक बंदी केंद्रीय जेल बरेली में बंद थे। आदेश पर अमल करते हुए मंगलवार को 12 बंदियों को आगरा केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया। सभी बंदियों को हत्या में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। बंदी 14 से 22 साल तक की सजा भुगत चुके हैं। एक बंदी की रिहाई बरेली जेल से की गई।
इन बंदियों को किशोर न्याय बोर्ड ने अपराध के वक्त नाबालिग घोषित किया था। अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2012 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर किए जाने के बाद किशोर न्याय बोर्ड को कैदियों की किशोरावस्था से संबंधित आवेदनों का निपटारा करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद सभी कैदियों को अपराध के समय नाबालिग घोषित किया गया था। आदेश के बावजूद इन बंदियों को रिहा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जेल में बंदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
केंद्रीय जेल के वरिष्ठ अधीक्षक वीके सिंह ने बताया कि 12 बंदियों को मंगलवार को रिहा कर दिया गया। एक बंदी को 24 जून, 2021 को आगरा से बरेली केंद्रीय जेल शिफ्ट कर दिया गया था। बंदी की अंतरिम जमानत का आदेश भेज दिया गया। उसकी भी रिहाई कर दी गई। बंदियों में से दो गाजियाबाद, छह बुलंदशहर, दो जेपी नगर और एक-एक बागपत, आगरा और मुरादाबाद के हैं। परिजनों को बुलाकर बंदियों को सौंपा गया।
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