याचिका में मांग की गई है कि भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की जमीन की डिक्री करने का अधिकार सोसाइटी को नहीं हो सकता है। लिहाजा सोसाइटी की जमीन की डिक्री खत्म कर भगवान श्रीकृष्ण विराजमान को 13.37 जमीन का मालिकाना हक दिया जाए। अधिवक्ता ने बताया कि याचिका में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट, श्री जन्मस्थान सेवा संस्थान को प्रतिवादी बनाया गया है।
'मंदिर की सामग्री से अग्रभाग पर मस्जिद का निर्माण कराया'
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के विशेष कार्याधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य वर्तमान कटरा केशव देव स्थित कंस के कारागार में लगभग 5247 वर्ष पूर्व हुआ था। श्रीकृष्ण के प्रपौत्र व्रजनाभ ने उसी का कारागर स्थली पर श्री केशव देव के प्रथम मंदिर की स्थापना की। कालांतर में यहां बार-बार मंदिरों का निर्माण हुआ। अंतिम 250 फीट ऊंचा मंदिर जहांगीर के शासनकाल में ओरछा के राजा वीर सिंह देव ने बनवाया, जिसे औरंगजेब ने 1669 में ध्वस्त कर मंदिर की सामग्री से मंदिर के अग्रभाग पर ईदगाह मस्जिद बनवाई, जो वर्तमान में विद्यमान है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि हमारे संज्ञान में मामला आया है। दायर याचिका की कापी हमें अभी नहीं मिली है। कॉपी मिलने पर उसका अध्ययन किया जाएगा कि कितनी जमीन के लिए याचिका दायर की गई है। इसके बाद ट्रस्ट के समक्ष उसे रखा जाएगा। विधि परामर्श और ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा आगे का निर्णय लिया जाएगा।
'मस्जिद कहीं भी बन सकती है'
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि पटनीमल परिवार से लेकर आज तक श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट जीतता आया है। रेवेन्यू, म्युनिसिपल रिकॉर्ड में मालिकाना हक में हमारा नाम है। लगान और टैक्स हम देते हैं। हमारी संपत्ति पर अवैध कब्जा कर रखा है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि दूसरी नहीं हो सकती लेकिन मस्जिद कहीं भी बन सकती है। जैसे अध्योध्या में दूसरे स्थान पर मस्जिद बन रही है, ऐसे ही सौहार्द के नाते दूसरे स्थान पर मस्जिद बना दी जाए। इसके लिए हम सहयोग देंगे।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य देवमोरारी बापू ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली पर भव्य श्रीकृष्ण मंदिर बने, इसकी मुहिम के लिए जो भी संस्था, ट्रस्ट, समाजसेवी आगे आएगा, हमारा ट्रस्ट श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करेगा। हमने यह मुहिम इस साल एक फरवरी से शुरू की थी।
बीच में संतों से संपर्क करते हुए हमने 23 जुलाई को ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन कराया और इस ट्रस्ट से 22 प्रदेशों के 250 संत जुड़े हुए हैं। सबकी यही मांग है कि भगवान श्रीराम की तरह मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थली पर हुए कब्जे को खाली कराकर भव्य श्रीकृष्ण जन्मस्थान बनाया जाए। यही मांग अखाड़ा परिषद अध्यक्ष व संतों की भी है, जिन्होंने 7 सितंबर को प्रयागराज में बैठक कर मांग की है।
ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव तनवीर अहमद एडवोकेट ने कहा कि मथुरा सौहार्द की नगरी है। यहां ईद पर हिंदू गले मिलने आते है तो होली पर हम लोग उनके गले मिलते हैं। दीवाली और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी साथ-साथ मनाते आए हैं। यहां कोई विवाद की स्थिति है ही नहीं और आगे भी नहीं होगी। दोनों धर्म स्थल बराबर हैं। मंदिर में भगवान की पूजा होती है और मस्जिद में नमाज अदा होती है। दोनों धर्मस्थलों के रास्ते व सीमाएं अलग-अलग हैं। 1967 में दोनों धर्मस्थल के पदाधिकारियों के बीच आपनी भाईचारे और आदर बनाए रखने के लिए भी समझौता हुआ है। हम देखेंगे कि दायर याचिका में हमें पार्टी बनाया गया है या नहीं। इसके बाद ही कमेटी आगे का निर्णय लेगी।
भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण हमारे आराध्य- ऊर्जा मंत्री
ऊर्जा मंत्री एवं शहर विधायक श्रीकांत शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण हमारे आराध्य हैं। अयोध्या में न्यायालय के आदेश पर भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर जो भी निर्णय न्यायालय के माध्यम से हो उसका स्वागत करना चाहिए। आस्था के विषय पर समाज के सभी वर्गों को एक-दूसरे की भावना का सम्मान करना चाहिए।
विधायक गोवर्धन कारिंदा सिंह ने कहा कि अयोध्या आंदोलन में भी सक्रिय रहे थे। तब भी हमने न्यायालय के निर्णय के सम्मान की बात कही थी। श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर यदि मामला न्यायालय में जाता है तो निर्णय का स्वागत किया जाएगा। हालांकि भगवान श्रीकृष्ण हमारे आराध्य हैं इनकी जन्मभूमि को मुक्त कर हिंदू समाज की भावना का सम्मान करना चाहिए। श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए।