कासगंज। बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं चिंता का विषय बन गई हैं। पिछले तीन महीनों में जिले में 22 लोग मौत को गले लगा चुके हैं। इसमें पुलिस उपनिरीक्षक भी शामिल हैं। पुलिस तफ्तीश में पाया गया है कि कई लोगों ने सिर्फ परिवार में हुई कलह में मामूली बात पर आत्महत्या कर जान दे दी। आत्महत्या करने वालों में जिले में तैनात रहे पुलिस के उपनिरीक्षक देवी सिंह भी शामिल हैं।
हालांकि इन्होंने आत्महत्या पांच महीने पहले की थी। पुलिस ने जांच के दौरान यह पाया था कि वह कई दिनों से तनाव में थे। इसी के चलते उन्होंने जान देदी थी। हालात यह हैं कि प्रति हफ्ते दो से तीन लोग अपनी मर्जी से मौत को चुन लेते हैं।
जागे सरकारी तंत्र, हो सामाजिक पहल
आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता की जरूरत है। सरकारी तंत्र हो या सामाजिक कार्यकर्ता या फिर संगठन। यदि लोगों को जिंदगी में संघर्ष की सीख देते हुए अभियान चलाकर जागरूकता करें तो निश्चित ही ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकेगी।
जिले की कुछ घटनाएं-
केस 1 पति पत्नी दोनों ने चुनी मौत
- बीती 5 अगस्त को पटियाली क्षेत्र के गांव भैंसराशि में पति के साथ दिल्ली जाने की जिद पर अड़ी 22 वर्षीय पत्नी रिंकी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी मिलने पर दिल्ली जा रहा पति राजीव रास्ते से लौटकर गांव पहुंचा और आत्महत्या कर ली।
केस 2- गृह क्लेश में दी जान
बीते माह 4 अगस्त को ढोलना क्षेत्र के गांव नगला नारायन में मोनू(22) पुत्र दाताराम ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह पेशे से ड्राइवर था और मामूली बात पर ही गृहक्लेश के चलते उसने अपनी जान दे दी।
क्या कहते हैं जानकार
- व्यक्ति घोर निराशा की स्थिति में आत्महत्या करता है। जब उसे यह लगने लगता है कि उसकी कोई बात न सुनने को तैयार है और न समझने को तैयार है। परिवार के लोग भी महत्व नहीं देते। ऐसी स्थिति में आत्महत्या का रास्ता लोग चुन लेते हैं। सोशल मीडिया का भी बेहद प्रभाव है कि अब सोशल मीडिया पर तो फे्रंड हैं जिनसे सभी बात शेयर नहीं की जा सकतीं, लेकिन निजी जिंदगी के दोस्त भी अब दूर होते जा रहे हैं- डा. रानू शर्मा, समाजशास्त्री।