कासगंज के सोरोंजी में हरि की पौडी गंगा घाट पर पहुंचे श्रद्धलु ।
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कासगंज। पति की दीर्घायु के लिए सोमवार को महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखेंगी। वहीं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु की कामना करेंगी। इसके लिए सुहागिन महिलाओं ने रविवार को तैयारी की। व्रत-पूजा से संबंधित सामान बाजार से खरीदा।
ज्येष्ठ की अमावस्या को वट अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस दिन वट सावत्री व्रत रखकर सुहागिनें वट वृक्ष की पूजा करती हैं। शहरी क्षेत्रों मे सबसे अधिक समस्या वट वृक्ष की रहती है। इसलिए आसपास के क्षेत्रों से वट की टहनी मंगवाई गईं है। कुछ मंदिरों में वट पूजा को लेकर पुजारी भी व्यवस्थाओं में जुटे रहे ताकि महिलाएं मंदिरों में पूजा कर सकें।
यह है मान्यता
सावित्री ने ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट वृक्ष के नीचे अपने पति सत्यवान की यमराज से सुरक्षा की थी। तभी से सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य आदि की कामना की जाती है।
यह है पूजा विधि
मेहता संस्कृत पाठशाला के आचार्य राहुल वशिष्ठ ने पूजा की विधि बताई है। उनके अनुसार टोकरी में रेत भरकर ब्रह्मा की मूर्ति स्थापित करें तथा वाम पार्श्व में सावित्री की मूर्ति स्थापित करें। दूसरी टोकरी में सत्यवान सावित्री की मूर्ति स्थापित करें। दोनों टोकरियों को वट वृक्ष के नीचे रखें। सबसे पहले ब्रह्मा सावित्री की पूजा करें फिर सत्यवान सावित्री की पूजा करें। वट वृक्ष को पानी दें। जल, फूल, रोली, कच्चा सूत, भिगोया चना, गुड़ तथा धूप दीप से पूजा करें। जल चढ़ाकर वृक्ष के चारों ओर कच्चा धागा लपेट कर तीन बार परिक्रमा करें। वट के पत्तों की माला पहन कर कथा का श्रवण करें। भीगे हुए चने का वायना निकाल कर उस पर धन रखकर अपनी सास को देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।