कासगंज। कोरोना के प्रथम चरण के टीकाकरण के लिए बाल विकास विभाग में तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका डाटा देने में लापरवाही बरत रहीं है। एक माह से अधिक समय हो जाने के बाद भी विभाग से इनका डाटा स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध नहीं कराया है। ऐसे में विभाग को डिमांड बनाने में दिक्कतें आ रही हैं।
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए शासन ने प्रथम चरण के वैक्सीनेशन के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी सेवा से जुडे़ चिकित्सक, फार्मासिस्ट, एएनएम, स्टाफ नर्स, आशा कार्यकर्ता, लैब टैक्नीशियन, महिला व पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता, महिला व पुरुष स्वास्थ्य पर्यवेक्षक आदि को शामिल किया है। इसके अलावा रेलवे अस्पताल में तैनात चिकित्सक व स्टाफ का भी वैक्सीनेशन होगा।
वहीं निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत क्लीनिक, चिकित्सक व स्टाफ को भी प्रथम चरण के वैक्सीनेशन के लिए चुना गया है। इसके अलावा बाल विकास विभाग में तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं को भी प्रथम चरण में वैक्सीनेशन कराया जाना है। विभाग ने सरकारी सेवा से जुडे़ चिकित्सक व स्टाफ का तो डाटा संग्रहीत कर लिया है, लेकिन बाल विकास विभाग के यहां से डाटा भेजने में लापरवाही सामने आ रही है। बाल विकास विभाग में इस समय 2157 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं 1502 सहायिका कार्यरत हैं। इन सभी का डाटा मांगा गया है। लेकिन विभाग से अभी तक काफी में स्टाफ का डाटा ही उपलब्ध कराया गया है।
बाल विकास विभाग से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं का डाटा वैक्सीनेशन के लिए मांगा गया है, लेकिन अभी तक काफी कम संख्या में डाटा आया है। विभाग को जल्द डाटा भेजने के लिए कहा गया है। --डॉ. प्रतिमा श्रीवास्तव, सीएमओ