कासगंज में एक खेत में होती गन्ना की फसल
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कासगंज। मृदा और पर्यावरण सुधार की दिशा में गन्ना विभाग ने भी मजबूत पहल की है। पराली प्रबंधन के लिए अभियान तेज किया है। किसानों को ऑनलाइन प्रबंधन के तरीके बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि किस तरह गन्ने के अवशेष से खेत में ही आर्गेनिक खाद तैयार कराई जा सकती है। किसान भी गन्ना विभाग के अभियान से जुड़कर सकारात्मक सोच के साथ आर्गेनिक खाद तैयार करने के गुर सीख रहे हैं।
अधिकतर किसान गन्ना कटाई के बाद जो अवशेष, सूखी पत्तियां बचती हैं। उनका प्रबंधन नहीं करते। कुछ किसान तो खेत में ही पत्तियों को जला देते हैं। जिससे उपजाऊ भूमि की उर्वरा शक्ति तो कम होती ही है साथ ही पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ जाता है। इसलिए किसानों को पराली प्रबंधन के गुर बताए जा रहे हैं। गन्ने के अवशेष से किसानों को आर्गेनिक खाद तैयार करने के तरीके गन्ना विभाग द्वारा सिखाए जा रहे हैं, लेकिन यह सब ऑनलाइन किया जा रहा है। इसी के साथ पराली प्रबंधन के गुर सीखने का संदेश भेजा जा रहा है।
ऐसे बनाएं पत्तियों से खाद
जिला गन्ना अधिकारी ओमप्रकाश यादव ने बताया कि सूखी पत्तियों से खाद बनाना बेहद आसान है। गन्ना की कटाई के बाद सूची पत्तियों को खेत में फैला दें उसके बाद सिंचाई कर दें। फिर 40 किलोग्राम यूरिया खाद प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें। 7-8 दिन में पत्तियां गल जाएंगी और फिर खेत में आर्गेनिक खाद तैयार हो जाएगी। इससे खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी जीवांश बढ़ जाएंगे। एक बार गन्ना बुवाई के बाद तीन से चार बार तक फसल तैयार की जा सकेगी।