हार्दिक की कैटरिंग बंद हुई तो ऑर्गेनिक फूड की सप्लाई शुरू कर दी
विजय नगर निवासी 21 वर्षीय हार्दिक अग्रवाल अपने पिता संग करीब 100 वर्ष पुराना कैटरिंग का सफल कारोबार संभालते थे। कभी कल्पना भी नहीं की थी कि ये दिन भी देखने को मिलेंगे। लॉकडाउन में सभी तरह की गतिविधियां बंद होने के कारण कारोबार भी ठप हो गया। पिता का उदास चेहरा देखा नहीं जाता था। इधर, कुछ ऐसा काम शुरू करने का मन था, जो इस समय के माहौल के अनुकूल हो।
हार्दिक ने बताया कि कम पूंजी से ऑर्गेनिक फूड का काम शुरू किया। इसमें दाल, तेल, घी, चावल आदि को शामिल किया। न केवल शहर में अन्य शहरों की तरफ भी रुख किया। इसके लिए ई-कॉमर्स के माध्यम से भी काम शुरू कर दिया। इस समय उनका टर्नओवर करीब पांच लाख तक पहुंच गया है।
ढलाई का काम बंद, शैलेश ने शुरू की बेसन इकाई
15 वर्षों से ढलाई का काम कर रहे शैलेश अग्रवाल की जिंदगी में भी लॉकडाउन से ठहराव आ गया। जमा हुआ काम चार माह के लंबे समय के लिए बंद हो जाना कष्टकारी था। ऐसे में नया काम करने की चुनौती थी।
शैलेश ने बताया कि पिछले साल वह बीमार पड़ गए थे। तब लगा कि लोगों द्वारा पैसे देने के बावजूद उन्हें सही खाना नहीं मिल रहा है। यही सोच लॉकडाउन खुलने के बाद बेसन की निर्माण इकाई शुरू की। इसके अंतर्गत प्रीमियम क्वालिटी का बेसन बनाना शुरू किया। कुछ समय में कारोबार लाभ की स्थिति में पहुंच गया है।