मन में लगन है तो कोई लक्ष्य मुश्किल नहीं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है मथुरा की सुनीता ने। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की छात्रा सुनीता को 83वें दीक्षांत समारोह में तीन गोल्ड मेडल मिले। यह मुकान उन्होंने जीवन के उस पड़ाव पर हासिल किया जहां पहुंचकर लोग पढ़ने की सोच तक नहीं पाते।
मथुरा में ओल के श्रीमती रामदुलारी देवी कॉलेज से एमए हिंदी करने वाली सुनीता को राष्ट्रपति की मौजूदगी में 3 गोल्ड मेडल दिए गए। सुनीता की ये उपलब्धि इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि उन्होंने शादी के कई साल बाद दोबारा पढ़ने का साहस किया और अपनी मेहनत और लगन से एमए हिंदी में विवि टॉप किया।
दो बच्चों की मां सुनीता बताती हैं कि शादी के बाद पढ़ाई शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन हर कदम पर साथ दिया उनके पति ने। घर का काम और बच्चों को संभालने के साथ ही पढ़ाई कर पाने थोड़ी दिक्कतें रहीं लेकिन जब वे आगे बढ़ी तो परिवार का भी सहयोग मिलने लगा।
सुनीता ने बताया कि उनके पति डॉ. जगवीर सिंह श्रीमती रामदुलारी देवी महाविद्यालय, ओल में जूलॉजी के शिक्षक हैं। शादी के बाद उनके पति ने ही आगे पढ़ाई जारी करने के लिए प्रेरित किया। सुनीता ने बताया कि पति के सपोर्ट के बिना इस मुकाम तक पहुंच पाना बहुत मश्किल था। सुनीता शिक्षक बनना चाहती हैं।