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लगन हो तो ऐसीः घर संभाला, 2 बच्चों को पाला और पढ़ाई में हासिल किया ये मुकाम

Wed, 06 Dec 2017 04:58 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला आगरा
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सुनीता - फोटो : अमर उजाला
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मन में लगन है तो कोई लक्ष्य मुश्किल नहीं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है मथुरा की सुनीता ने। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की छात्रा सुनीता को 83वें दीक्षांत समारोह में तीन गोल्ड मेडल मिले। यह मुकान उन्होंने जीवन के उस पड़ाव पर हासिल किया जहां पहुंचकर लोग पढ़ने की सोच तक नहीं पाते। 
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मथुरा में ओल के श्रीमती रामदुलारी देवी कॉलेज से एमए हिंदी करने वाली सुनीता को राष्ट्रपति की मौजूदगी में 3 गोल्ड मेडल दिए गए। सुनीता की ये उपलब्धि इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि उन्होंने शादी के कई साल बाद दोबारा पढ़ने का साहस किया और अपनी मेहनत और लगन से एमए हिंदी में विवि टॉप किया। 

दो बच्चों की मां सुनीता बताती हैं कि शादी के बाद पढ़ाई शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन हर कदम पर साथ दिया उनके पति ने। घर का काम और बच्चों को संभालने के साथ ही पढ़ाई कर पाने थोड़ी दिक्कतें रहीं लेकिन जब वे आगे बढ़ी तो परिवार का भी सहयोग मिलने लगा। 
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सुनीता ने बताया ‌कि उनके पति डॉ. जगवीर सिंह श्रीमती रामदुलारी देवी महाविद्यालय, ओल में जूलॉजी के शिक्षक हैं। शादी के बाद उनके पति ने ही आगे पढ़ाई जारी करने के लिए प्रेरित किया। सुनीता ने बताया कि पति के सपोर्ट के बिना इस मुकाम तक पहुंच पाना बहुत मश्किल था। सुनीता शिक्षक बनना चाहती हैं। 
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यूं पूरा हुआ सुनीता की पढ़ाई का सफर

अमर उजाला से बातचीत में सुनीता के पति डा. जगवीर सिंह ने बताया कि 2004 उनकी शादी के समय सुनीता बीए तक पढ़ी थीं। पति ने शिक्षा की अहमियत को समझते हुए उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। इस पर 2007 ने उन्होंने एमए संस्कृत की पढ़ाई पूरी की। 

इसी दौरान उनकी बेटी का जन्म हुआ और पढ़ाई रुक गई। 2009 में बेटे का जन्म हुआ। इसके बाद 2012 में सुनीता ने बीएड की डिग्री हासिल की। इससे उनका हौसला और बढ़ गया। इसके बाद 2015-2017 में उन्होंने एमए हिंदी की परीक्षा उत्तीर्ण की और इसमें गोल्ड मेडल पाए। 
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