चांदी की बढ़ती कीमतों से कारोबारी सकते में हैं। चांदी के गहने और आइटम की बिक्री धड़ाम हो गई है। ऐसे में इसके विकल्प के तौर पर जर्मन सिल्वर की मांग तेजी से बढ़ी है। बीते पांच-छह महीने में इसकी 500 फीसदी तक बिक्री बढ़ गई है।
जर्मन सिल्वर कारोबारी सतीश अग्रवाल ने बताया कि चांदी की बढ़ती कीमत से कारोबार प्रभावित हो रहा है। सामान्य ग्राहक भी नहीं आ रहे हैं। ऐसे में विकल्प के तौर पर लोग जर्मन सिल्वर से बने गहने-आइटम खरीद रहे हैं। इसकी बिक्री की दर 500 फीसदी तक बढ़ी है। अभी चांदी की कीमत 3.30 लाख रुपये प्रतिकिलो है।
जर्मन सिल्वर के दाम 6000 से 50 हजार रुपये प्रति किलो है। इसमें 2 से 12 फीसदी चांदी होती है। चांदी के मुकाबले यह बेहद सस्ती है। लोग जर्मन सिल्वर के पायल, बिछुआ, कढ़ा, अंगूठी, बर्तन, सजावटी सामान खूब बनवा रहे हैं। खास बात लोग इसके आइटम वजनदार बनवाने पर जोर दे रहे हैं। जर्मन सिल्वर से बने गहने-आइटमों का रंग चांदी के मुकाबले लंबे समय बाद काला पड़ता है। इसकी चमक दो साल तक बरकरार रहती है। चांदी का रंग चंद दिनों में ही हवा-पानी के संपर्क में आने से काला पड़ने लगता है।
कृत्रिम ज्वेलरी की भी बढ़ी मांग
कृत्रिम ज्वेलरी विक्रेता विनय अग्रवाल ने बताया कि सोने-चांदी के दामों में बेतहाशा वृद्धि कृत्रिम ज्वेलरी की ओर लोग आ रहे हैं। यह बेहद सस्ती है। इसमें सोने-चांदी जैसे दिखने वाले गहने बनाए जाते हैं।
क्या होता है जर्मन सिल्वर
इसे व्हाइट मेटल भी बोलते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसे जर्मन सिल्वर बोला जाता है। इसे जस्ता, जिंक और निकल से बनाया जाता है। इसे जस्ता, जिंक, निकल मिलाकर बनाया जाता है। इसमें 2 से 12 फीसदी चांदी भी होती है। गहनों-आइटम की ऊपरी परत चांदी की होती है। इसके बने गहने-आइटमों में चांदी जैसी चमक होती है। तीन धातु और मिश्रित होने के चलते ये मजबूत भी अधिक होती हैं।