सेंट्रल जेल के अधिकारी शासन को यह रिपोर्ट भी नहीं भेज पा रहे हैं कि कुल कितने कैदी भूख हड़ताल पर हैं। परेशानी इसलिए आ रही है कि जेल के सभी 2050 कैदियों ने खुद को भूख हड़ताल पर बता रखा है जबकि आधे से ज्यादा ऐसे हैं जो मुलाकातियों से मिला भोजन मजे से खा रहे हैं। इनके अलावा 80-90 ऐसे भी हैं जो सुबह को रोजाना नाश्ता करते हैं और दोपहर भूख हड़ताल पर बैठे बंदियों में शामिल हो जाते हैं। उधर दसवें दिन भी हड़ताल जारी रही।
हड़ताल चार कैदियों ने शुरू की थी। इसके बाद 20 तक आंकड़ा पहुंचा। फिर सभी 350 कैदी इसमें शामिल हो गए जो उम्र कैद की सजा में 14 साल या इससे अधिक जेल में काट चुके हैं। इन्हें मनाने के लिए अधिकारी और कारागार राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी आए। नतीजा उल्टा निकला। अगले ही दिन सभी कैदियों ने भूख हड़ताल का एलान कर दिया। इसके बाद से ही असमंजस बना है। आधे से ज्यादा कैदी सुबह का नाश्ता कर रहे हैं। मुलाकातियों से मिला भोजन खा रहे हैं लेकिन खुद को भूख हड़ताल पर बता रहे हैं।
दोगुनी हो गई मुलाकातियों की संख्या
जेल में कैदियों से मिलने के लिए आने वाले मुलाकातियों की संख्या दस दिन में दोगुनी हो गई है। एक और फर्क यह आया है कि पहले के मुकाबले मुलाकाती खाने का सामान भी ज्यादा ला रहे हैं।
दस दिन कोई कैसे भूखा रह सकता है
जेल अधिकारियों का दावा है कि दस दिन लगातार भूख हड़ताल करने वाला कैदी एक भी नहीं है। इसके पीछे उनका तर्क है कि इतने दिन कोई बंदी बगैर खाए कैसे रह सकता है।