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UP: तहसीलदार न्यायालय में आया गजब का मामला...मौत के बाद लड़ा मुकदमा, अब पत्रावली हो गई गायब

Sat, 09 Nov 2024 03:02 PM IST
धीरेन्द्र सिंह ज्योत्यवेंद्र दुबे, मैनपुरी

सार

मैनपुरी की घिरोर तहसील में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां भूमि के नामांतरण के मुकदमे में बड़ी लापरवाही सामने आई। मरे हुए व्यक्ति ने मुकदमा लड़ा। मंडलायुक्त ने रिपोर्ट मांगी तो पोल खुल गई। 

 
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court new - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 राजस्व न्यायालयों में मनमानी के मामले तो सामने आते रहते हैं। इस बार तहसीलदार न्यायालय घिरोर का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मृतक ने न केवल मुकदमा लड़ा बल्कि न्यायालय से आदेश भी पारित कराया। इसके बाद पत्रावली भी न्यायालय से गायब हो गई। ये सब मंडलायुक्त द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में सामने आया है। अब जिम्मेदार इसे दबाने में जुटे हैं।
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मामला तहसील घिरोर के गांव फेरती से जुड़ा है। तहसीलदार न्यायालय घिरोर में 2016 में रघुवीर सिंह पुत्र लाखन सिंह के नाम से वाद योजित किया गया। इसी वाद के आधार पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने भूमि के नामांतरण का आदेश भी पारित कर दिया। ये न्यायालय की प्रक्रिया है, इसमें कुछ भी खास नहीं है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 2009 में ही रघुवीर सिंह की मौत हो चुकी थी। तहसीलदार न्यायालय घिरोर में 2016 में मृतक रघुवीर सिंह ने बैनामा के आधार पर अपने नाम भूमि दर्ज कराने के वाद दायर किया। तहसीलदार ने भी सुनवाई के बाद वाद में आदेश पारित कर भूमि उनके नाम करा दी।

हाल ही में गांव तिसाह निवासी लल्लू सिंह पुत्र शौकीराम निवासी तिसाह ने मंडलायुक्त से पूरे मामले की शिकायत की थी। मंडलायुक्त ने सीडीओ मैनपुरी से रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। सीडीओ के आदेश पर एडीएम न्यायिक नवीन कुमार श्रीवास्तव और डिप्टी कलेक्टर ध्रुव शुक्ला ने जांच रिपोर्ट दी। इसमें उन्होंने बताया कि संबंधित वाद की पत्रावली ही न्यायालय से गायब हो चुकी है। इसलिए जानकारी देना ही संभव नहीं है।
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पत्रावली गायब करने के लिए संबंधित रीडर ही जिम्मेदार है। वहीं रघुवीर की मृत्यु में संबंध में पूरी जांच रिपोर्ट में कोई जिक्र ही नहीं किया गया। अब राजस्व विभाग के जिम्मेदार इस मामले को दबाने में जुटे हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि कार्रवाई हुई तो लेखपाल, कानूनगो से लेकर बड़े अधिकारियों की गर्दनें भी फंसेंगी। 


सीएम का आदेश भी नहीं मानते घिरोर तहसील के अधिकारी
शिकायतकर्ता लल्लू सिंह ने मंडलायुक्त को भेजे गए शिकायती पत्र में चारागाह की भूमि पर अवैध कब्जा कराने की शिकायत भी की थी। आरोप था कि लेखपाल और कानूनगो ने ये कब्जा कराया है। सीडीओ ने अपनी रिपोर्ट में चारागाह की जमीन पर अवैध कब्जा भी स्वीकार किया है। ऐसे में साफ है कि तहसील घिरोर के अधिकारियों के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश भी नहीं मानते हैं। अगर वे आदेश मानते तो सीएम के आदेश पर चारागाह की सरकारी भूमि से कब्जा हटवा देते।

प्रकरण में जांच हुई पूरी 
एसडीएम घिरोर प्रसून कश्यप ने बताया कि इस प्रकरण की जांच हो चुकी है, पत्रावली तहसीलदार न्यायालय से गायब है ये बात सही है। मामला 2016 का है, तत्कालीन कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।

मामला  संज्ञान में नहीं
डीएम अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसकी जानकारी की जाएगी। अगर कहीं गड़बड़ी हुई तो पूर प्रकरण की गहन जांच कराई जाएगी। न्यायालय से पत्रावली गायब करने के लिए जो भी दोषी होगा कार्रवाई की जाएगी।
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