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Health News: धूल-धुएं से बढ़ा नाक-कान में संक्रमण, बदल रही आवाज...जानें क्या कहते हैं चिकित्सक; देखें वीडियो

Sat, 09 Nov 2024 02:33 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

 प्रदूषण से लोगों में जुकाम-खांसी परेशान कर रही है, तो वहीं इस वजह से उनकी आवाज में भी परिवर्तन आ रहा है।  ये समस्या प्रदूषित शहरों में 3 से 5 फीसदी लोगों में मिल रही है।
 
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डॉ. समीर भार्गव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हवा में बढ़ते कार्बन और धूल के अतिसूक्ष्म कणों से नाक-कान का संक्रमण बढ़ रहा है। लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से स्वर यंत्र प्रभावित हो रहे हैं। इससे आवाज बदलना, साइनस की दिक्कत बन रही है। प्रदूषित शहरों में ऐसे 3 से 5 फीसदी मरीजों में दिक्कत मिल रही है। ये बातें फतेहाबाद रोड स्थित होटल में इंडियन सोसाइटी ऑफ ओटोलॉजी की कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कही।
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मुंबई से आए इंडियन ईएनटी सर्जंस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. समीर भार्गव ने कहा कि कारखाने-वाहनों के धुएं, पराली जलाने, प्लास्टिक कचरा जलाने और अन्य कारणों से हवा में कार्बन, लेड, सल्फर समेत अन्य घातक गैसों की दर बढ़ गई है। इससे नाक, कान, फेफड़े की नलिकाएं प्रभावित हो रही हैं। संक्रमण भी बढ़ रहा है। प्रदूषण से नलिकाएं संकुचित होने से गांठ बन रही है। असर स्वरयंत्र पर पड़ने से आवाज भारी होना, आवाज कम निकलना, आवाज में झन्नाहट, आवाज फटने जैसी परेशानी हो रही हैं। इनमें दवाओं से मरीज ठीक हो जाते हैं, 25-30 फीसदी में सर्जरी की जरूरत पड़ रही है।
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प्रदूषण के कारण साइनस के मरीज मिलने की दर भी बढ़ गई है। स्वस्थ लोगों को बुखार-खांसी, गले में खराश की समस्याएं भी बढ़ गई हैं। इससे पहले केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। डॉ. राममूर्ति ने इंडियन सोसाइटी ऑफ ओटोलॉजी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। अध्यक्ष डॉ. राकेश अग्रवाल, सचिव डॉ. राजीव पचौरी, डॉ. संजय खन्ना, डॉ. रीतु गुप्ता, डॉ. गौरव खंडेलवाल, डॉ. आलोक मित्तल, डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता, डॉ. एलके गुप्ता, डॉ. मनीष सिंघल, डॉ. सलोनी सिंह बघेल आदि मौजूद रहे।

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कान के पर्दे में छेद का खतरा
 गाजियाबाद के डॉ. ओमवीर सिंह ने कहा कि लंबे समय तक जुकाम-खांसी की परेशानी से कान के पर्दे पर दबाव पड़ता है। ऐसी स्थिति से कान के पर्दे में छेद का खतरा बढ़ गया है। संक्रमण से कान की हड्डी गलने पर कान की ही दूसरी हड्डी लेकर स्थापित करते हैं। गोरखपुर के डॉ. राजन भार्गव ने कहा कि ईयरफोन लगाने से कान की हड्डी पर अधिक दबाव पड़ता है। इससे सुनने की क्षमता कम हो रही है।

लकवे से विकृत चेहरे हो रहे हैं ठीक
एम्स दिल्ली के ईएनटी विभाग के डॉ. आलोक ठक्कर ने कहा कि लकवा, चोट लगने और सड़क हादसे से विकृत चेहरे को सर्जरी से काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। दवाएं और सर्जरी से नसों को ठीक करते हैं, जिससे टेढ़ा-मेढ़ा चेहरा काफी हद तक पूर्व के आकार में आ जाता है।
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