कासगंज। कालीनदी में गिरते शहर के गंदे पानी से हाल फिलहाल नदी को मुक्ति नहीं मिल पाएगी। गंदे पानी का दंश अभी चार महीने और कालीनदी को झेलना होगा। अप्रैल महीने तक निर्माण का लक्ष्य आगरा जलनिगम तय कर चुका है। फिलहाल 45 प्रतिशत तक काम एसटीपी पर पूरा हो पाया है।
शहर के नाले, नालियों का पानी काली नदी में गिर रहा है। केमिकल युक्त पानी के इस्तेमाल से बीमारियां फैलने का खतरा सता रहा है। इससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है। इस पर सरकार ने अमृत योजना के तहत कासगंज में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण शुरू कराया। दो साल पहले स्वीकृत हुए इस प्लांट पर एक साल से निर्माण का काम चल रहा है। गाजियाबाद की कार्यदायी संस्था विभोर वैभव की ओर से इस प्लांट पर मात्र 45 प्रतिशत तक काम हुआ है। हालांकि प्लांट के निर्माण का लक्ष्य अप्रैल 2021 तक है। यहां काम की रफ्तार अभी और बढ़ाने की जरूरत दिखाई दे रही है।
तो कैसे पूरा होगा लक्ष्य
एक साल से इस प्लांट पर काम चल रहा है। एक साल में कार्यदायी संस्था मात्र 45 प्रतिशत काम पूरा कर पाई है। अब मात्र 4 महीने में 55 प्रतिशत तक काम किस तरह पूरा होगा। यह कार्यदायी संस्था के सामने चुनौती का विषय है।
यह है उद्देश्य
एसटीपी निर्माण का उद्देश्य शहर के नाले नालियों का काली नदी में गिरता गंदा पानी शुद्ध कराने के बाद ही नदी तक पहुंचा जाए। इस योजना के तहत अमरपुर और नदरई के गंदे नाले लिंक किए जाएंगे। दोनों ही नालों का पानी सीवरेज प्लांट में शुद्ध कराने के बाद ही काली नदी में पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा गंदे पानी का जो कचरा बचेगा उसमें पॉलिथीन को पालिका के डंपिंग ग्राउंड में डाला जाएगा और शेष कचरे से खाद बनाई जाएगी।
माघ मेले को लेकर की जा रही हैं तैयारी
प्रयागराज का माघ मेला जनवरी से प्रस्तावित है। ऐसे में कालीनदी के पानी को शुद्ध करने की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई है। बोर्ड की ओर से प्रयास तो किए जा रहे हैं लेकिन एसटीपी का काम निर्माणाधीन होने के कारण अभी शहर का पानी कालीनदी में ही गिरेगा।
यह हो चुका है काम
कालीनदी पर प्राइमरी ट्रीटमेंट यूनिट का काम 75 प्रतिशत तक हो चुका है। इस ट्रीटमेंट प्लांट पर 16 करोड़ रुपये की लागत से यंत्र खरीदे जाने हैं। इनमें 1.5 करोड़ की लागत के यंत्र आगरा जलनिगम खरीद चुका है। इसके अलावा अमरपुर और नदरई जिन नालों का पानी नदी में गिरता है वहां से ट्रीटमेंट प्लांट तक सीवर पाइपलाइन बिछा ली गई है।
आंकड़े की नजर से-
- 67.56 करोड़ रुपये से एसटीपी निर्माण की मिली है स्वीकृत।
- 15 मिलियन लीटर पानी प्रतिदिन शुद्ध करने की क्षमता का बनाया जा रहा एसटीपी।
- 33.32 करोड़ रुपये से निर्माण के बाद होगा रख रखरखाव।
- 15 साल तक रखरखाव का जिम्मा निभाएगी कार्यदायी संस्था।
वर्जन-
- एसटीपी का निर्माण कार्यदायी संस्था द्वारा किया जा रहा है। कुल निर्माण 45 प्रतिशत तक हो गया है। कुछ काम इससे अधिक हो चुके हैं। जैसे ही निर्माण के बाद मशीनें लगाने का काम शुरू हो जाएगा तो फिर काम में और रफ्तार आ जाएगी। समय रहते काम पूरा करने पर जोर है। - गौरव शर्मा, अवर अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण इकाई, जल निगम आगरा।