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UP: राजनीति के बादशाह थे सेठ अचल सिंह, 25 वर्ष तक कायम रही बादशाहत; जनता पार्टी की लहर में हिल गया सिंहासन

Wed, 20 Mar 2024 12:54 PM IST
भूपेन्द्र सिंह यथार्थ मिश्रा, आगरा

सार

आगरा में सेठ अचल सिंह अपने समय में राजनीति के बादशाह थे। 25 वर्ष तक उनकी बादशाहत कायम रही। फिर जनता पार्टी की लहर में उनका भी सिंहासन हिल गया और हार मिली। 
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आगरा के पहले सांसद सेठ अचल सिंह
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में लोकसभा चुनाव के दौरान सेठ अचल सिंह के नाम का जिक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। एक ऐसा नाम जिसने चुनावी रणनीति में ऐसी लकीर खींची जिसे अब तक कोई पार नहीं कर सका। वह वर्ष 1952 से लेकर 1972 तक लगातार पांच बार आगरा सीट से सांसद रहे। उन्होंने आजादी के लिए आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ आवाज भी बुलंद की।

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सेठ अचल सिंह न सिर्फ देश की आजादी के आंदोलन में योगदान के लिए, क्षेत्रीय विकास के लिए बल्कि चुनाव में अपनी बादशाहत के लिए जाने जाते हैं। चुनाव मैदान में उनका दबदबा लगभग 25 साल कायम रहा। उन्होंने लगातार पांच लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की।

वह नेहरू परिवार के करीबी माने जाते थे। मोती लाल नेहरू उनके परिवार के वकील थे। इस वजह से उनका कांग्रेस से सीधा संबंध रहा। कहा जाता है कि वह कोई बड़ी रैली और रोड शो नहीं करते थे। नुक्कड़ सभाएं कर चुनाव प्रचार करते। बड़ी संख्या में लोग उनको पैदल ही सुनने आ जाते थे। वर्ष 1952 से लेकर 1972 तक वह आगरा लोकसभा सीट (जो तब आगरा डिस्ट्रिक्ट (वेस्ट) के नाम से जानी जाती थी) से सांसद चुने गए।

कृष्णदत्त पालीवाल को भी हराया

पहले लोकसभा चुनाव में उन्होंने कृष्णदत्त पालीवाल को भारी वोटों से हराया। वर्ष 1957 में भी कृष्णदत्त पालीवाल उनसे हार गए। तीसरा लोकसभा चुनाव कृष्ण दत्त पालीवाल ने नहीं लड़ा। तब सेठ अचल सिंह का मुकाबला आरपीआई के हाजी हैदर बख्श से हुआ और लगभग 50,000 वोटों से जीते। 

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चौथे लोकसभा चुनाव में विरोधी प्रत्याशी बदला लेकिन चुनाव परिणाम वही रहा और वर्ष 1967 के चुनाव में हीरोरानी को हराया। पांचवें चुनाव में उन्होंने भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) के प्रत्याशी बाबूराम सिंघल को हराया। राजनीति ने करवट बदली और 1977 में हुए चुनाव में जनता पार्टी की लहर उठी, शंभूनाथ चतुर्वेदी ने उन्हें शिकस्त दी।

आगरा लोकसभा सीट से कब कौन रहा सांसद

  • 1952 से 1972- सेठ अचल सिंह (कांग्रेस)
  • 1977- शंभू नाथ चतुर्वेदी (जनता पार्टी)
  • 1980 से 1984- निहाल सिंह (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
  • 1989- अजय सिंह (जनता दल)
  • 1991 से 1998- भगवान शंकर रावत (भारतीय जनता पार्टी)
  • 1999 से 2004- राज बब्बर (समाजवादी पार्टी)
  • 2009 से 2014- राम शंकर कठेरिया (भारतीय जनता पार्टी)
  • 2019- एसपी सिंह बघेल (भारतीय जनता पार्टी)
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