हैचिंग पीरियड में मादा मगरमच्छ नेस्टिंग के पास पैर की थपकी देती है। यदि अंडों के भीतर बच्चों की हलचल की आवाज सरसराहट के रूप में सुनाई देती है तो मादा मगरमच्छ नेस्टों से बालू हटा देती है और अंडों से बाहर आए बच्चों के साथ चंबल नदी में चली जाती है। इस साल बाह रेन्ज में हैचिंग के जरिये 156 मगरमच्छ शिशुओं का जन्म हुआ है। यह संख्या पिछले साल से 54 अधिक है।
चंबल सेंक्च्युरी में घड़ियालों के साथ मगरमच्छों का कुनबा भी बढ़ा है। शुक्रवार को चंबल नदी में हैचिंग के जरिये 156 मगरमच्छ शिशुओं का जन्म हुआ। बाह के कछियारा में 1 नेस्ट से 30 शिशु, नंदगवां में 2 नेस्ट से 64 शिशु, खरिक में 1 नेस्ट से 32 शिशु और उदयपुर खुर्द में 1 नेस्ट से 30 शिशुओं का जन्म हुआ। बता दें कि पिछले साल चार नेस्टों के 120 अंडों से 102 शिशुओं का जन्म हुआ था। तब 18 अंडे नष्ट हो गए थे। इस साल खास बात ये रही कि कोई अंडा खराब नहीं हुआ।
हैचिंग पीरियड शुरू होते ही वनकर्मियों ने नेस्टों पर लगाई जाली हटा दी। इस पीरियड में मादा मगरमच्छ का मूवमेंट नेस्ट के आसपास ही रहता है। उसके पैर की थपकी की आवाज पर नेस्ट के अंदर हलचल होने पर जमा बालू को मगरमच्छ ने हटाया और फिर अंडों से निकले बच्चों के साथ मादा नदी में चली गई। बता दें कि नदी में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर मगरमच्छ हमलावर हो जाते हैं। वन विभाग ने नदी के तटवर्ती गांवों के लोगों को सतर्क कर दिया है। रेंजर वन्य जीव बाह आरके शर्मा ने बताया कि इस साल हैचिंग से 156 मगरमच्छ शिशुओं का जन्म हुआ है। जो अब तक का सबसे अच्छा रिकार्ड है। वन विभाग की टीम इनके बेहतर सर्वाइवल को लेकर मानीटरिंग कर रही है।