आरटीओ दफ्तर के बाहर समानांतर व्यवस्था चला रहे दलाल अब दफ्तर के अंदर भी जा रहे हैं। यहां कैमरे लगे हैं, अफसर भी बैठते हैं, लेकिन दलालों को कोई डर नहीं है। एडीएम प्रोटोकॉल ने 30 दिन पहले छापा मारा था, तब दलाल 20 दिन अंदर नहीं आए, अब फिर से इनकी दलाली का खेल शुरू हो गया है। अमर उजाला टीम के कैमरे में ये रिकॉर्ड हुए। एक पटल से दूसरे पटल तक जाकर आसानी से काम करा रहे थे।
समय दोपहर 1:20 बजे: स्थान : आरटीओ दफ्तर की नई इमारत
आरटीओ कार्यालय की नई इमारत की ओर फाइलें हाथ में पकड़े दलाल आवेदकों के साथ लाइसेंस पटल में घूम रहे हैं। वह पटलों पर जाकर बायोमेट्रिक और टेस्ट कराने के लिए सेटिंग कर रहे हैं। आवेदक उनके पीछे चल रहे हैं। इसी तरह स्थायी लाइसेंस के कक्ष में आवेदकों की लंबी लाइन है। यहां भी तीन दलाल टहल रहे थे।
समय : दोपहर 1:35 बजे: स्थान : आरटीओ दफ्तर की पुरानी इमारत
इस इमारत में रजिस्ट्रेशन, ट्रांसफर आदि के कार्य होते हैं। यहां भी दलालों की आवाजाही साफ नजर आई। वह लिपिकों से बातचीत कर रहे हैं। परमिट अनुभाग में बाहर के दो युवक दिखाई दिए। दोनों काफी देर तक आपस में बातचीत करते नजर आए। दरअसल स्लॉट निकलने के बाद दूसरी तारीख मिलने के कारण आवेदक परेशान था, वह आज ही टेस्ट करवाना चाहता था, लेकिन दलाल ने इनकार कर दिया।
कैमरे हैं, पर रिकॉर्डिंग कोई नहीं देख रहा
कार्यालय में अधिकारियों के कक्षों में सीसीटीवी की स्क्रीन लगी हैं, जिन पर गेट से अंदर आने वाले लोगों को साफ देखा जा सकता है। इन पर सभी पटलों पर हो रही गतिविधियां साफ नजर आती हैं, लेकिन अधिकारी रिकॉर्डिंग देख ही नहीं रहे हैं।
छापे पड़े, लेकिन कोई असर नहीं
सितंबर 2019 में एडीएम प्रोटोकाल व एसीएम ने छापा मारकर बाहरी लोगों के दखल को स्वीकार किया था। सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी जब्त कर ली थी।
जनवरी 2020 में आरटीओ के सामने एडीए द्वारा आवंटित दुकानों पर जमे दलालों पर अंकुश के लिए प्रशासन की टीम ने दुकानों का सर्वे किया। उनकी टैक्स आदि की जानकारी हासिल की थी। तब आधे से ज्यादा दुकानदार दुकानें बंद करके चले गए थे, लेकिन दूसरे ही दिन से दुकानें दोबारा खुल गईं।
आरटीओ के निर्देश भी काम न आए
1-कार्रवाई के बाद मुख्य द्वार पर दो होमगार्ड की ड्यूटी लगाई, जोकि आवेदकों से पूछताछ के बाद अंदर आने दे रहे थे। कुछ दिन बाद दोनों होमगार्ड हटा दिए गए।
2-सुधार करने के लिए एनाउंसमेंट सिस्टम लगवाया। इस पर बाहरी लोगों से काम नहीं कराने की बात कही जाती है। समस्या होने पर एआरटीओ और संभागीय निरीक्षक से मिलने को कहा जाता है।
3-स्थायी लाइसेंस कक्ष में एक पूछताछ खिड़की खोली गई है, जहां आवेदक लाइसेंस समेत अन्य कार्यों के लिए पूछताछ करके जानकारी हासिल कर सकते हैं।