मथुरा पुलिस द्वारा पकड़े गए पीएफआई सदस्य
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विदेशी फंडिंग से दंगा फैलाने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) व सीएफआई (कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया) के सदस्यों की गिरफ्तारी मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच नहीं, एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) करेगी। गृह मंत्रालय के आदेश पर यह जांच बुधवार को स्थानांतरित कर दी गई है।
दिल्ली से हाथरस जाते समय पांच अक्तूबर को मांट टोल प्लाजा पर पुलिस ने पीएफआई/सीएफआई के चार सदस्यों अतीकुर्रहमान, सिद्दीक, आलम और मसूद को पकड़ा था। इन सभी को एसडीएम मांट ने जेल भेजा। बाद में इनके खिलाफ राजद्रोह समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। इस केस की जांच क्राइम ब्रांच के सीओ कर रहे थे। मंगलवार देर शाम गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश मथुरा पुलिस तक पहुंचा, जिसमें जांच एसटीएफ को सौंपने की बात कही है। बुधवार को यह जांच एसटीएफ को स्थानांतरित भी कर दी गई। सीओ क्राइम ब्रांच डीएस चौहान ने बताया यह जांच एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी गई है।
जिला जज के न्यायालय में लगाई जमानत अर्जी
सीजीएम कोर्ट के एपीओ बृजमोहन ने बताया के सीजेएम न्यायालय से अतीकुर्रहमान, आलम और मसूद की जमानत 11 अक्तूबर को खारिज हो गई थी, जबकि पोर्टल पत्रकार सिद्दीक की जमानत अर्जी नहीं लगाई थी। तीनों के अधिवक्ता ने जिला जज के न्यायालय में जमानत अर्जी लगाई है।
मिली सिद्दीक से मिलने की अनुमति
सिद्दीक ने अपनी गिरफ्तारी के मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं को लगाया है। अधिवक्ता सिद्दीक से मिलना चाहते हैं। सात दिन पूर्व अधिवक्ता जेल तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया। जेल में मुलाकात के लिए उन्होंने सीजीएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन सीजेएम ने इस पर सुनवाई नहीं की। एपीओ बृजमोहन के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता को न्यायालय ने अभियुक्त सिद्दीक से मिलने की अनुमति नहीं दी है।