22 अगस्त को एसटीएफ और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने आगरा कैंट स्टेशन से लेकर आए 87 लाख की दवाओं से भरे टेंपो को पकड़ा था। दवाओं की जांच में नकली दवाएं मिली थीं। इसकी पुष्टि होने पर हे मां मेडिकल एजेंसी पर टीम पहुंची थी। संचालक हिमांशु अग्रवाल ने कार्रवाई रोकने के लिए एक करोड़ रुपये की पेशकश की थी। टीम ने रुपयों के साथ उसे पकड़ लिया था।बाद में बंसल मेडिकल एजेंसी पर भी टीम गई थी। मामले में दो मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। एक मुकदमा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में लिखा गया। इसमें हिमांशु अग्रवाल को जेल भेजा जा चुका है। वहीं दूसरा मुकदमा नकली दवाओं के मामले में छह लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है।
इसमें हे मां फर्म का संचालक, लखनऊ की दो फर्मों, कुरियर कंपनी के दो संचालक और एक एजेंट भी शामिल हैं। फरार आरोपियों की तलाश में टीम लगी है।उधर, दवाओं की जांच की कार्रवाई अभी जारी है। मंगलवार दोपहर 1:30 बजे औषधि विभाग और एसटीएफ की टीम मोती कटरा स्थित श्री राधे मेडिकल एजेंसी के गोदाम पर पहुंची। यहां पर दो दिन पहले भी टीम आई थी, तब गोदाम बंद मिला था। इस पर गोदाम को सील कर दिया गया था। इस बार सील हटाकर तालों को तोड़ा गया। शाम चार बजे गोदाम खुलने पर जांच की गई। इनमें भारी मात्रा में दवाएं मिलीं।
राधे मेडिकल एजेंसी का मालिक दीपक सिंघल हे मां मेडिकल एजेंसी के संचालक हिमांशु अग्रवाल का भाई है। सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि शिकायत मिली थी कि नकली और बिना बिल की दवाओं का भंडारण किया गया है। इस पर टीम जांच के लिए पहुंची। एजेंसी के मालिक दीपक सिंघल को फोन किया गया मगर फोन स्विच आफ आया। उनका होलसेल का लाइसेंस है। पहली मंजिल पर भारी मात्रा में दवाएं बरामद की गईं। गोदाम में कई कार्टन और रैक में दवाएं मिली हैं। वहीं दूसरी मंजिल पर भी गोदाम में कई कार्टन में दवाएं भरी मिलीं। कई करोड़ की दवाएं मिलने की आशंका है। दवाओं के सैंपल जांच को भेजे गए हैं।