डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय पाठक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद एसटीएफ ने और तेजी पकड़ी है। पूर्व में विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में बीएड के अंकपत्र, नकल कराने, प्रवेश और नियुक्तियों में फर्जीवाड़े की शिकायतें मिल चुकी हैं। एसटीएफ दागी कॉलेजों पर शिकंजा कसने के लिए उनकी सूची तैयार कर रही है।
मई में आगरा कॉलेज के द्वितीय पाली की परीक्षा में बीएससी तृतीय वर्ष, जंतु विज्ञान द्वितीय और गणित द्वितीय का प्रश्नपत्र परीक्षार्थियों के मोबाइल पर पहुंचा था। 15 मई को रसायन विज्ञान का प्रथम प्रश्नपत्र छात्रा के मोबाइल में मिला था। पुलिस की जांच में पता चला कि अछनेरा स्थित हरिचरण लाल महाविद्यालय के प्रधानाचार्य अनेक सिंह ने प्रश्नपत्र आउट किया था। वह केवल इंटर पास था। प्रबंध समिति के कहने पर पेपर लीक करता था। कॉलेज को मान्यता मानकों की अनदेखी करके दी गई थी।
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एसटीएफ की जांच का दायरा बढ़ने से अपने काम से काम रखने वाले भी जांच के फंदे में आने से डर रहे हैं। कई कर्मचारी और अधिकारियों ने तो परिचितों से भी दूरी बना ली है। फोन तक नहीं उठा रहे हैं। उन्हें डर है कि एसटीएफ आरोपी नहीं तो साक्ष्य जुटाने में उनको कहीं गवाह नहीं बना दे। ऐसे में रोजाना ड्यूटी पर तो आ रहे हैं, लेकिन किसी से संपर्क करने से घबरा रहे हैं।
कुलपति प्रकरण के बाद एसटीएफ के संपर्क में 6 कॉलेजों के संचालक हैं। मान्यता देने से लेकर केंद्र निर्धारण और निर्माण में घपले की शिकायत कर रहे हैं। कुछ तो लिखित शिकायत दर्ज करा रहे हैं। ऐसे में एसटीएफ भी कॉलेजों की गोपनीय जांच में लगी है। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। आरोप सही निकले तो लपेटे में कई ओर लोग आ जाएंगे।