कुलपति की ओर से अप्रैल में कॉलेज संचालकों का कंपनी का नाम, पता और खाता संख्या भी व्हाट्सअप पर भेजी गई। विश्वविद्यालय के स्टाफ से पूछताछ में एसटीएफ को इस खेल में सैकड़ों कॉलेजों से करोड़ों रुपये जुटाने की जानकारी मिली है। एसटीएफ के एसपी राकेश कुमार ने बताया कि प्रो. पाठक के कार्यकाल में हुए धांधली और भ्रष्टाचार के कई मामलों की जांच चल रही है। विश्वविद्यालय स्टाफ से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारी मिली हैं।
जिला प्रशासन का सहयोग लेकर किया उद्घाटन
विश्वविद्यालय के सूत्रों ने बताया कि कुलपति ने चंदे के तौर पर करोड़ों रुपये कानपुर की एजेंसी के खाते में जमा करवाने के बाद सितंबर में हुए दीक्षांत समारोह में आरबीएस कॉलेज में योजना का विधिवत उद्घाटन करवाया। राज्यपाल का ड्रीम प्रोजेक्ट बताकर जिला प्रशासन को कार्यक्रम में सहयोगी बना लिया। चंदे में जुटे करोड़ों रुपये में से चंद लाख खर्च कर औपचारिक रूप से किट बंटवा दीं।
परीक्षा केंद्र और स्थायी कोर्स की मान्यता का था वादा
आंगनबाड़ी किट के लिए कॉलेजों को अस्थायी कोर्स को स्थायी करने और उनके कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाने का वादा किया। चंदा देने के बाद इन कॉलेजों के कई अस्थायी कोर्स को बिना भौतिक सत्यापन किए शपथपत्र के आधार पर कोर्स को स्थायी मान्यता भी दी और परीक्षा केंद्र भी बनाए गए। इस पर विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ (औटा) ने विरोध भी किया था।