शहर को बंदरों के उत्पात से निजात दिलाने के लिए शासन ने नसबंदी कराने की अनुमति दे दी है। पहले चरण में 500 बंदरों को पकड़कर कीठम स्थित भालू संरक्षण गृह ले जाया जाएगा। वहां नसबंदी के बाद उन्हें उसी स्थान पर छोड़ा जाएगा जहां से पकड़कर लाए थे।
शहर में बंदरों की वजह से लोगों के जान माल का नुकसान हो रहा है। बंदरों को शहर से बाहर कराने के लिए 2009 से कोशिश की जा रही हैं, लेकिन नगर निगम को सफलता नहीं मिली है। कभी मामला वन विभाग में अटक जाता तो कभी पीएफए के नियमों में उलझने से कार्रवाई नहीं हो पाती। 2009 में नगर निगम ने कोशिश की थी कि बंदरों को चित्रकूट के जंगलों में छोड़ दिया जाए, लेकिन सभी तैयारियां तब धरी रह गईं जब चित्रकूट प्रशासन ने नगर निगम को ठेंगा दिखा दिया। नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि पहले चरण में 500 बंदरों की नसबंदी कराने की अनुमति मिली है।
पहले इन स्थानों से पकड़े जाएंगे बंदर
बुधवार को इस संबंध में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में वे स्थान चिह्नित किए हैं जहां से बंदर पकड़े जाएंगे। इनमें कलेक्ट्रेट, एसएन मेडिकल कालेज और बेलनगंज पर सहमति बनी है। उन्होंने बताया कि अभी केंद्र सरकार के एक नियम की अड़चन है। इस पर राय मांगी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि नसबंदी से बंदरों की आबादी पर नियंत्रण होगा और उनका उत्पात भी कम हो जाएगा।