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यमुना के जलचर संकट में, आक्सीजन की मात्रा घटी

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मथुरा। यमुना में धड़ल्ले से गिर रहे फैक्टरियों के जहरीले पानी के कारण पानी में घुलित ऑक्सीजन खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। माना जा रहा है कि यह 4 एमएलडी से भी कम है। जिसके कारण जलचर मर रहे हैं। एक दिन पूर्व मछलियों के मरने का कारण इसी ऑक्सीजन स्तर में कमी होना माना जा रहा है। उधर, प्रदूषण विभाग पानी के सैंपल लेकर इसकी जांच में जुटा है ।
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यमुना में बारिश के दौरान सीधे गिरे नालों के पानी ने सैंकड़ों मछलियों की जान ले ली थी। गंदगी युक्त पानी के यमुना में सीधे गिरने से घाट किनारे मछलियां मरी पाई गईं थीं। इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई। जानकारी मिलते ही नोडल अधिकारी एडीएम वित्त एंव राजस्व ब्रजेश कुमार ने इसकी जांच के लिए प्रदूषण विभाग को निर्देश दिए थे।
प्रदूषण विभाग अभी सैंपल लेकर जांच में जुटा है। वहीं, माना जा रहा है कि मछलियों के जिंदा रहने के लिए 4 एमएलडी से अधिक ऑक्सीजन प्रति लीटर यमुना जल में चाहिए होती है। फैक्टरियों के जहरीले पानी के कारण ऑक्सीजन की यह मात्रा काफी कम पहुंच गई होगी जिसके कारण मछलियां मर गईं। जांच कर रहे प्रदूषण विभाग के अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि उन्होंने बंगाली घाट तथा केसी घाट से सैंपल लिए हैं। उनकी रिपोर्ट मिलने के बाद पता लग सकेगा कि ऑक्सीजन की मात्रा कितनी है ।
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एनजीटी के आदेश हवा में
फैक्टरी संचालकों द्वारा अधिकारियों से सांठगांठ कर अभी जहरीला तथा केमिकल युक्त पानी को सीधे तौर पर यमुना में गिराया जा रहा है। विगत दिनों प्रदेश स्तर के प्रदूषण कमेटी के रिटायर्ड जज ने मौके पर एक फैक्टरी से सीधे तौर पर यमुना में पानी गिरते देखा था । इसके बाद भी प्रदूषण विभाग
द्वारा कैमीकल का प्रयोग करने वाली फैक्टरियों की कोई जांच तक नहीं की । अब जब कि मछलियों ने दम तोड़ दिया है तो यह अधिकारी इन फैक्टरियों को हरी झंडी देने की तैयारी कर रहे हैं ।
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