खंडपीठ स्थापना की मांग कर रहे वकीलों ने प्रधानमंत्री से मिलने के लिए मंगलवार को मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. रामशंकर कठेरिया के आवास के बाहर अनशन किया। शाम को डॉ. कठेरिया ने वित्त मंत्री अरुण जेतली से मिलवाने का आश्वासन देकर अनशन समाप्त कराया।
जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट लागू करवाना तो दूर, वकील अभी राजनेताओं से मिलकर अपनी बात रखने के लिए ही संघर्ष कर रहे हैं। आगरा में प्रधानमंत्री से मुलाकात न हो पाने से आहत कुछ युवा अधिवक्ताओं ने कठेरिया को घेरने की कोशिश की। मंगलवार की सुबह से अजय चौधरी, पूरन सिंह राजपूत और लोकेंद्र त्यागी ने अनशन शुरू कर दिया। पुलिस ने उनका तंबू नहीं गढ़ने दिया तो वे जमीन में ही चादर बिछाकर बैठ गए। इस दौरान पुलिस से नोकझोंक भी हुई।
शाम लगभग साढे़ पांच बजे मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री अनशन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि कोशिश करेंगे कि एक हफ्ते में प्रधानमंत्री से मुलाकात करा दें। वैसे तीन-चार दिन के अंदर वित्त मंत्री अरुण जेतली से अवश्य मुलाकात करा देंगे। क्योंकि इस तरह की समस्याओं को देखने के लिए प्रधानमंत्री ने अरुण जेतली को ही कहा है। उन्होंने वकीलों को आश्वस्त किया कि वे पूरी तरह से उनके साथ हैं। उनके इस आश्वासन पर अनशन समाप्त कर दिया गया। इस अवसर पर आशुतोष श्रोत्रिय, दरवेश यादव, यशपाल राणा, देव चौधरी, नितिन शर्मा, एसपी भारद्वाज, कमल कुमार आदि मौजूद रहे।
संघर्ष समिति से नाराजगी
आगरा। अनशन के दौरान युवा अधिवक्ताओं ने खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति के कुछ पदाधिकारियों से नाराजगी जताई। हालांकि संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी मनीष कुमार सिंह वहां मौजूद रहे। सचिव अरुण सोलंकी भी पहुंचे थे। लेकिन युवा अधिवक्ताओं का कहना था कि समिति के आह्वान पर वे कहीं भी खड़े रहते हैं। आज, जब उन्होंने अनशन किया तो पूरा सहयोग नहीं मिला।