गुरुकुल यानि एक ऐसा स्थान जहां विद्यार्थी अपने गुरु के साथ रहकर शिक्षा प्राप्त करते हैं। लेकिन आज के समय में बहुत कम गुरुकुल नजर आते हैं, लेकिन ताजनगरी में एक अनोखा ऐसा गुरुकुल संचालित है, जहां ईसाई पुरोहित बनने की दीक्षा दी जाती है।
विज्ञापन
प्रतापपुरा स्थित सेंट लारेंस सेमीनेरी अपने आप में पुरोहिताई प्रशिक्षण का अद्भुत उदाहरण है। इटली के फ्रांसिस्कन संत लारेंस ऑफ ब्रिण्डीसी के नाम पर समर्पित इस संस्थान की स्थापना वर्ष 1965 में तत्कालीन धर्माध्यक्ष डॉ. डॉमिनिक अथैड ने की थी। इससे पूर्व आगरा महाधर्मप्रांत के कैथोलिक पुरोहित के लिए शिक्षा दीक्षा अजमेर के सेंट ट्रांजा सेमीनेरी में दी जाती थी।
10 से 12 वर्ष तक का लगता समय
भारत वर्ष में एक कैथोलिक ईसाई पुरोहित बनने की दीक्षा में करीब 10 से 12 वर्ष तक का समय लगता है। इस समय सेंट लारेंस सेमीनेरी में 15 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यहां के गुरुकुलाचार्य फादर प्रकाश डिसूजा हैं।
विज्ञापन
फादर विनिवर्सल सहायक गुरुकुलाचार्य हैं। फादर मून लाजरस और फादर जॉन फरेरा, फादर प्रकाश रॉड्रिग्ज शिक्षक मंडली के सदस्य एवं आध्यात्मिक निर्देशक हैं। आगरा महाधर्मप्रांत के डॉ. आल्बर्ट डिसूजा गुरुकुल के शैक्षिक बोर्ड के चेयरमैन हैं।
गुरुकुल के लिए होती है प्रवेश परीक्षा
गुरुकुल में प्रवेश के लिए बच्चों को परीक्षा देनी पड़ती है। यहां दीक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को कम से कम दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी है।
यहां से आए हैं छात्र
इस समय गुरुकुल में अध्ययन करने वाले छात्र देश के विभिन्न राज्यों से आए हैं। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राज्यस्थान, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं।
आगरा में होती प्रारंभिक चार वर्षां की शिक्षा
सेंट लारेंस सेमीनेरी में प्रारंभिक चार वर्षों की ही शिक्षा दी जाती है। इस दौरान छात्रों को स्थानीय भाषा हिंदी, अंग्रेजी, ब्रज भाषा, योग, संगीत, अध्यात्म, धर्म शिक्षा, पूजा पद्घति, मनोविज्ञान के साथ में बागवानी, खेतीबाड़ी आदि की प्रायोगिक शिक्षा भी दी जाती है।
यहां से मसीह गुरुकुल जाते हैं छात्र
सेंट लारेंस सेमीनेरी से शिक्षा दीक्षा प्राप्त कर छात्रों को चार वर्षों के लिए एत्मादपुर स्थित मसीह गुरुकुल (सेंट फ्रांसिस जेवियर सेमीनेरी) भेजा जाता है। वहां एक वर्ष के आध्यात्मिक निर्देशन के बाद अगले तीन वर्षों तक उन्हें दर्शन शास्त्र की शिक्षा दी जाती है। इसके बाद छात्र एक वर्ष के लिए किसी एक पुरोहित के साथ रहने के लिए भेजे जाते हैं। जहां वे पुरोहित से व्यक्तिगत रूप से निर्देशन प्राप्त करते हैं।
प्रयागराज है अंतिम पड़ाव
एक साल तक गुरु के सानिध्य में रहने के बाद छात्र ईशशास्त्र के चार वर्षीय गंभीर अध्ययन के लिए प्रयागराज स्थित सेंट जोसफ क्षेत्रीय गुरुकुल जाते हैं। वहां लगभग साढे़ तीन वर्ष की शिक्षा के बाद छात्रों का उपयाजक अभिषेक होता है।
छह माह पूर्व होता अभिषेक
प्रयागराज में चार वर्ष की दीक्षा लेने वाले छात्रों का साढे़ तीन वर्ष शिक्षा लेने के बाद पुरोहित अभिषेक होता है। अभिषेक विधि के दौरान छात्र को महाधर्माध्यक्ष के समक्ष ब्रह्मचर्य, आज्ञापालन और निर्धनता के तीन व्रत लेने होते हैं।
गुरुकुल में फादर जो थाइकाटिल, फादर जॉन फरेरा, फादर मैथ्यु, कुम्बलुमुट्टिल, फादर जार्ज पॉल, फादर डेनिस डिसूजा, फादर भास्कर, जेसुराज, फादर मून लाजरस ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ली। फादर मून आगरा के स्थानीय पुरोहित हैं।
अब तक हो चुके 78 पुरोहित तैयार
इस गुरुकुल से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद अब तक करीब 78 पुरोहित तैयार हो चुके हैं। इनमें से अधिकांश पुरोहित शहर में ही शिक्षा, चिकित्सा और समाज सेवा में कार्य कर रहे है। आगरा में संचालित स्कूल, कॉलेज में भी कुछ पुरोहितों ने प्रधानाचार्य का पदभार ग्रहण किया हुआ है। तो कुछ पुरोहित चर्च में आध्यात्म का ज्ञान बांट रहे हैं।
इस वर्ष चार नए पुरोहितों का अभिषेक
गुरुकुल के आध्यात्मिक निर्देशक फादर मून लाजरस ने बताया कि इस वर्ष आगरा महाधर्मप्रांत में चार नए पुरोहितों का अभिषेक हुआ है। उनमें सभी छात्रों की प्रारंभिक शिक्षा सेंट लारेंस सेमीनेरी में हुई थी।