ब्रज में भक्तन कौ सैलाब उमड़ परयौ ऐं। मथुरा ते लैके वृंदावन तलक राधे-राधे की गूंज सुनाई दे रही ऐं। जा समय कोई रस्ता ऐसे नाय जहां भक्तन की भीड़ दिखाई नाय दे रही होय।
क्योंकि वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में लाला कौ जन्म दिवस शुक्रवार की रात को मनायो गयो हो। जा काजे वृंदावन में खूब भीड़ जुड़ी। 24 अगस्त कूं मथुरा में कान्हा कौ जन्मदिना मनायो जायेगो, एक दिना पहले ते ई अपार भीड़ जुड़वो शुरू है गई। मथुरा शहर दुल्हन की तरियां सज गयो ऐं।
और लोग तो भलई कृष्ण कूं ईश्वर माने पर ब्रजवासी तो कहें ऐं.. कृष्ण के सखा हम गुलाम राधा रानी के। जाई काजै ब्रजवासी तौ जन्माष्टमी की बाट पूरे बरस जोहते रहें। पिछले कई दिनान ते जन्माष्टमी की तैयारी चल रही हैं।
कहीं पाग-पंजीरी, सकल पारे, मटरी, सेब और व्रत का सामान बनायो जाय रयो ऐं। पंडित राधा बिहारी गोस्वामी कौ कहनो ऐं, पूरे ब्रज के घर घर में कृष्ण को जन्म हेवे की खुशी मनाई जाये रईयी ऐं।
दरवज्जेन पे हल्दी-मेहंदी के थापे, केला के खंब, और बंदरबारन ते द्वार-द्वार सजे भये ऐं। लगेएं ऐं य्हईं आज कृष्ण का जन्म भयो ऐं। लक्ष्मण प्रसाद यादव कौ कहनो ऐं, जन्माष्टमी पहले ते हर साल जोरदारी ते मनाई जावे ऐं।हमें बड़ी खुशी होवे जब सिगरी दुनिया जा पर्व कूं मनावे ऐं। जुगल जी बैंक वाले ने हूं जा बात की हां-में हां मिलाई।
खीरा में तै प्रकट होयंगे लड्डू गोपाल आधी रात कूं होयगो लाला कौ जन्म
ब्रज में जे प्राचीन परंपरा ऐं कि लड्डू गोपाल गोपाल कूं खीरा में ते मध्यरात्रि निकास के बिनको जन्म करावें और फिर पंचामृत स्नान के बाद पोशाक धारण कराय पलना में झूला झुलामें ऐं। और गामें..जशोदा जी पलना में ललना झुलामें। घर-घर में कांच-लकड़ी और पीतल के पालने सजायबे की होड़ लगी भई ऐं।
जन्म के बाद पंचामृत, धनिये की पंजीरी और फलन कौं प्रसाद बांटो जायेगौ। ठाकुर जीं कूं धूप-दीप और कपूर तै आरती करके लाला की राई नौन तें नजर उतारी जाएगी। बड़े बड़े आग के लुक्कान पे राई नौन लाल कूं उसार के डारयो जायेगो।
एक जशोदा और नंदबाबा को श्रंगार करके लाला कूं चकई, भौरा और खेल खिलौनान ते बहलामिंगे। झुनझुलना बजामिंगे नंद और जशोदा। तबई खुलेगौ जे जन्माष्टमी कौ व्रत।