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पितृपक्ष मे होता है कौवे का विशेष महत्व,लगातार घट रही संख्या

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श्राद्ध पक्ष में कौओं का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि ये पितरों के संदेश वाहक होते हैं। इसलिये इन्हें कराया गया भोजन सूक्ष्म रूप से पितरों तक पहुंचता है और उन्हें संतुष्टि मिलती है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि कौआ एक मात्र ऐसा पक्षी है जो पितृ दूत कहलाता है। लेकिन अब कौओं की संख्या अनकूल पर्यावरण न होने के कारण घटती जा रही है। श्राद्ध पक्ष में कौआ न मिलने से श्रद्धलुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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इस कारण लुप्त हो रहा कौआ
पितृ दूत कहलाने वाला कौआ आज शहरी और कस्बाई इलाकों से तो गायब हो ही रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इनकी संख्या में कमी आ गई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शहरों का विस्तार, पेड़ों की कटाई, ऊंची इमारतों के कारण प्रकृति का निरंतर ह्रास हो रहा है, इसी के चलते कौआ भी गायब होते जा रहे हैं।
लोगों की बात
श्राद्ध पक्ष में कौआ यदि हमारे हाथों से दिया गया भोजन ग्रहण कर लेते है तो ऐसा माना जाता है कि पितरों कि कृपा हमारे ऊपर है। इससे पूर्वज हमसे प्रसन्न होते है। पहले घर की छतों पर अक्सर कौआ दिख जाता था। लेकिन अब बहुत कम ही दिखाई देता हैं। - राधेलाल माहेश्वरी
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श्राद्ध पक्ष मे कौऔं का महत्व बहुत अधिक माना गया है। पितृपक्ष मे यदि हम कौओं को भोजन कराते है तो यह भोजन उनके माध्यम से हमारे पितृ ग्रहण करते है। अब कौआ दिखाई नही देते, इनकी संख्या घट रही है। - सुभाष चंद्र गुप्ता।
क्या बोले विशेषज्ञ।
कौओं की दो प्रजाति होती हैं, एक घरेलू दूसरी जंगली। घरेलू प्रजाति का कौआ घर में घोंसला बनाता है, लेकिन लोग इसे अपशकुन मानते हैं और घोंसला बनाने भी नहीं देते हैं। इससे कोआ प्रजनन नहीं कर पाते। इस तरह से जंगली कौवा पाखर, देसी आम व अन्य घने वृक्षों पर घोंसला बनाता है, लेकिन इन वृक्षों की संख्या घट रही है। इसी के चलते ये भी प्रजनन नहीं कम कर पा रहे हैं। इसी के चलते संख्या लगातार घट रही है। - दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।
लोग मरे हुए जानवरों के शव खुले में फेंक देते हैं। वे किसी ना किसी बीमारी से ग्रसित होते हैं। कौआ व अन्य पक्षी भी इसे खा लेते हैं। बीमारी उन्हें भी लग जाती है। इसके अलावा लगातार पेड़ पौधों के कटान के कारण इनके रहने का स्थान भी खत्म होता जा रहा है। यही कारण है कि श्राद्ध पक्ष में भी कौआ नहीं मिल रहा है।
नरेंद्र रावत, रेंजर अधिकारी, पटना पक्षी विहार
क्या बोले पुरोहित-
श्राद्ध पक्ष में कौओं का विशेष महत्व है। कौओं के माध्यम से पितरों को भोजन प्राप्त होता है। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं। यह मान्यता पुराणों में वर्णित है। श्राद्ध में कौओं के लिए भोजन दिया जाता है, लेकिन अब कौआ यदा कदा ही नजर आते हैं- पंडित सुशील गौड़।
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