दशहरा पर शनिवार को रावण दहन किया जाएगा। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। परंतु, 1992 में दशहरा पर रावण के 9 सिर का पुतला जलाया गया था। 1990 के दशक में आगरा में यह अनूठी परंपरा थी, जिसमें रावण के 10 नहीं 9 सिर बनाए जाते थे। 10वां सिर पूरा करने के लिए पुतले पर गधे का सिर रख दिया जाता था। यह खबर अमर उजाला संस्करण में 7 अक्तूबर 1992 को प्रकाशित हुई थी।
अमर उजाला आर्काइव के पन्नों में दर्ज है कि 1992 में दशहरा पर रामलीला मैदान में हर व्यक्ति तब चौंक उठा जब उसने रावण के 9 सिर वाला पुतला देखा। यूं तो रावण के चेहरे 10 होते हैं तभी उसे दशानन कहा जाता है। प्रकाशित खबर के अनुसार आगरा में पूर्व में लाला कोकामल के समय से एक अनूठी प्रक्रिया अपनाई जाती थी जिसमें रावण के पुतले में 10वें सिर के रूप में गधे का सिर लगा दिया जाता था। बाद में आपत्तियों के बाद 10 सिर का ही रावण बनाया जाने लगा। पुतला बनाने वाले को यह जानकारी न थी और उसने 9 सिर का ही रावण बना दिया और अंत में उसी को जलाया गया।
सांस्कृतिक प्रमाण नहीं
राम कथावाचक संत अरविंद महाराज बताते हैं कि गधे का सिर लगाने का कोई सांस्कृतिक या पौराणिक प्रमाण नहीं है। चारों वेदों का ज्ञाता और विद्वान होने के बावजूद भी रावण के जीवन में पवित्रता नहीं थी। इसलिए उसका आचरण मंदबुद्धि की तरह माना गया। इसी के प्रतिस्वरूप गधे का मुखौटा रावण के सिर पर लगाया जाता है।
आपत्ति के बाद कुछ समय बंद रही
साहित्यसेवी नंदन गुप्ता ने बताया कि लाला कोकामल के समय से ही यह अनूठी परंपरा चली आ रही थी। परंतु कई सामाजिक संगठन और लोगों की आपत्ति के बाद यह परंपरा कुछ समय के लिए बंद कर दी गई। बाद में दोबारा से रावण के पुतले में गधे का सिर लगाया जाने लगा।
सीता हरण के पाप पर लगाया गधे का सिर
देश के कई शहरों में रावण दहन के समय मनुष्य के 9 सिर और एक मुख्य सिर वाली जगह गधे का सिर लगाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि विद्वान रावण के पास 10 मनुष्यों जितना दिमाग है, लेकिन सीता हरण का जो पाप किया, उसे समाज ने बेहद खराब माना। इसलिए पुरानी रामलीलाओं में रावण के पुतले के 9 सिर और मुख्य सिर पर गधा बनाकर यह दर्शाया गया कि यह खराब काम था। बाद में बदलते समाज में इस पर आपत्तियां की गईं। उसके बाद से ज्यादातर रामलीलाओं ने इसे बंद कर दिया, पर कुछ शहरों में यह जारी है।