प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एकलपीठ ने बिना कारण बताए कोई आदेश पारित किया है, तो ऐसे आदेश के खिलाफ विशेष अपील सुनवाई योग्य होगी। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने एकलपीठ के 24 फरवरी 2026 का आदेश निरस्त कर दिया और मूल रिट याचिका को दोबारा सुनवाई के लिए बहाल कर दिया।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने आगरा निवासी संजय अग्रवाल की विशेष अपील स्वीकार करते हुए दिया। मामला आगरा की एक सोसायटी के पंजीकरण निरस्तीकरण से जुड़ा था। एकलपीठ ने अपीलीय प्राधिकारी के आदेशों को रद्द कर मामला दोबारा विचार के लिए भेज दिया था। हालांकि, एकलपीठ ने अपने आदेश में न तो मामले के तथ्यों का उल्लेख किया और न ही यह बताया कि अपीलीय आदेश किस आधार पर गलत थे।
इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में विशेष अपील दायर की। प्रतिवादी अधिवक्ता ने दलील दी कि आयुक्त के अपीलीय आदेश को एकलपीठ में चुनौती दी गई थी, इसलिए विशेष अपील सुनवाई योग्य नहीं।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सामान्यतः ऐसे मामलों में हाईकोर्ट नियमावली के तहत स्पेशल अपील पर रोक होती है लेकिन जब आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता हो और उसमें कारणों का अभाव हो तब यह रोक लागू नहीं होगी। अदालत ने याचिका को उसकी मूल स्थिति में बहाल कर दिया और नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया।