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Kasganj:  माता-पिता के निधन के बाद की उनकी अंतिम इच्छा पूरी, सात समंदर पार कर अमेरिका से गंगा घाट पहुंचे बेटे

Mon, 07 Nov 2022 11:07 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज

सार

बोले माता-पिता की भगवान वराह की भूमि में अगाध आस्था थी। वे मूल रूप से जयपुर के रहने वाले हैं। तीन पीढ़ी पहले जाकर अमेरिका में बस गए थे।
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माता-पिता की अस्थि विसर्जन करते बेटे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत की माटी से प्रेम और हिंदू संस्कारों के प्रति आस्था उन्हें सात समंदर पार से भगवान वराह की पावन धरा पर खींच लाई। माता-पिता की आत्मा को शांति मिले इसलिए हरि की पौड़ी पर आकर मोक्षदायिनी मां गंगा के आंचल में उनका अस्थि विर्जसन किया।

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अमेरिका के मूल निवासी स्टोन कारोबारी श्रीपाल और उनके भाई संजय जब अपनी कार से तीर्थनगरी उतरे तो उनके चेहरे पर सुकून का भाव था। साथ में श्रीपाल की पत्नी सुमन सिंह और संजय की पत्नी सागरिका सिंह, बहन मेरिलिन रॉड्रिगेज, बहनोई जेम्स माइकल, आगरा के मित्र अवधेश लवानियां भी थे। अमेरिका के न्यूयार्क में रहने वाले दोनों भाइयों ने बताया कि वह मूल रूप से जयपुर, राजस्थान के निवासी हैं। उनके परिवार के लोग तीन पीढ़ी पहले अमेरिका में जाकर बस गए। दोनों भाइयों का जन्म अमेरिका में ही हुआ। 

भावुक हुए श्रीपाल

बात करते-करते श्रीपाल अचानक भावुक होकर बोले माता-पिता से तीर्थनगरी के बारे में काफी बातें सुनी थीं। उनकी मां गंगा और वराह भगवान में अगाध आस्था थी। कोरोना की चपेट में आने से दो साल पहले उनका निधन हो गया। उनकी अस्थियां मां गंगा को समर्पित करने आए हैं। मां गंगा से विनती है कि उनको अपने आंचल में स्थान दे उनकी आत्मा को शांति दे। अमेरिका में रहते हुए भी भारत की याद सताती है। जब भी मौका मिले देश आ जाता हूं। यहां जो सुकून हो वह और कहीं नहीं। देश छूट गया लेकिन हम आज भी त्योहार और पंरपराओं के जरिए देश से जुड़े हुए हैं।

अमेरिका में मनाते हैं हर त्योहार 

वहां रहकर भी हर त्योहार मनाते हैं और परंपराओं का निर्वहन करते हैं। तीर्थपुरोहित गोपाल उपाध्याय रईस व आचार्य वीरेंद्रबल्लभ व्यास ने हरि की पौड़ी के बालाजी मंदिर वाले घाट पर विधि विधान पूर्वक अस्थि विसर्जन करवाया। इसके बाद सभी ने कछला घाट पर गंगा स्नान किया।

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