आठ बजे बेटा अनुज ट्यूशन से लौटा। पिता की शव देखकर वह गुमसुम हो गया। वह बरामदे में जाकर उस चारपाई पर बैठ गया जिस
पर खड़े होकर दिनेश ने फंदा लगाया था। जिस मफलर से पिता ने फंदा बनाया था, उसे हाथ में ले लिया। थोड़ी देर बाद उसने भी
खुदकुशी कर ली। उसे फंदे से उतारा गया लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी।
डौकी के नगरिया गांव में दूध व्यवसायी दिनेश कुमार (42) ने बुधवार सुबह पांच से छह बजे के बीच घर के अंदर ही खुदकुशी कर ली। इससे आहत उनके बेटे अनुज (12) ने दो घंटे बाद सुबह आठ बजे जान दे दी। पिता-पुत्र ने एक ही मफलर से फंदा बनाया, एक ही कुंदे में फंदा डाला और एक ही चारपाई पर खड़े होकर खुदकुशी की। पुलिस का कहना है कि दिनेश के शराब पीकर आने के कारण घर में कलह होती थी।
आत्महत्या का कोई और कारण अभी सामने नहीं आया है। परिजनों ने बताया किदिनेश सुबह पांच बजे सोकर उठे थे। वे लोग छह बजे पशुओं को चारा देकर लौटे तो उन्हें बरामदे में फंदे से लटकता देखा। वे उन्हें आगरा में निजी अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सक ने मृत बताया। शव को घर ले आए।
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पिता का शव देखकर गुमसुम हो गया था
आठ बजे बेटा अनुज ट्यूशन से लौटा। पिता की शव देखकर वह गुमसुम हो गया। वह बरामदे में जाकर उस चारपाई पर बैठ गया जिस पर खड़े होकर दिनेश ने फंदा लगाया था। जिस मफलर से पिता ने फंदा बनाया था, उसे हाथ में ले लिया। थोड़ी देर बाद उसने भी खुदकुशी कर ली। उसे फंदे से उतारा गया लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी।
परिजनों ने वजह नहीं बताई
एसपी पूर्वी के वेंकट अशोक ने बताया कि परिवार के लोगों ने घटना के कारण के बारे में कुछ नहीं बताया है। आसपास के लोगों से जानकारी मिली है कि घर में कलह रहती थी।
पिता का शव देखते ही गुमसुम हो गया था अनुज
एक कुंदा, एक मफलर और एक चारपाई... पिता-पुत्र की आत्महत्या की घटना में मौकेपर पहुंचे लोगों की जुबान पर ये तीन चीजें सबसे ज्यादा आ रही थीं। दोनों ने एक ही तरह से जान दी। जिस चारपाई पर खड़े होकर दिनेश ने फंदा गले में डाला, उसी पर खड़े होकर बेटा अनुज मौत के आगोश में समा गया। पिता-पुत्र एक दूसरे से बेइंताह प्यार करते थे। अनुज ने जैसे ही पिता का शव देखा, वह कुछ बोला नहीं, सिर्फ सुनता रहा कि उन्होंने जान कैसे दी है। उसी चारपाई पर जाकर गुमसुम बैठ गया। घर में कोहराम मचा था। इसी बीच उसने जान दे दी।
नगरिया गांव पिता-पुत्र की मौत के बाद गांव के सभी लोग सन्न रह गए। लोगों ने बताया कि सबसे छोटा बेटा होने के नाते अनुज पिता दिनेश का लाडला था। दिनेश के तीन बेटे और एक बेटी थी। इनमें अनुज अपने पिता के काफी करीब था। अनुज भी पिता को बहुत प्यार करता था। आसपास के लोगों ने बताया कि पिता की मौत के बाद कुछ देर तक वह गुमसुम सा बैठा रहा। फिर उठकर उसी स्थान पर पहुंचा, जहां उसके पिता ने फंदे से लटककर जान दी थी।
परिजनों ने बताया कि दिनेश के पास करीब 25 बीघा खेत था, जिसमें वह तीन भाई थे। खेती के अलावा वह गांवों से दूध एकत्र कर सेंटर पहुंचाने का काम भी करते थे। वहीं दिनेश का पुत्र अनुज पीएस इंटर कॉलेज भटपुरा में आठवीं का छात्र था। कोरोना के कारण स्कूल बंद होने से वह ट्यूशन पढ़ रहा था।