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UP: अंसल एपीआई ग्रुप पर एक और FIR, प्लॉट के नाम पर बेच दिया खेत; पूर्व सैनिक की पत्नी ने दर्ज कराई शिकायत

Mon, 09 Mar 2026 08:33 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

आगरा में अंसल एपीआई ग्रुप के मालिक समेत तीन लोगों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है। आरोप है कि टाउनशिप में प्लॉट बेचने के नाम पर 12.50 लाख रुपये लेने के बाद पता चला कि जमीन किसी किसान की है और वहां खेती हो रही है।
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विवादों में अंसल ग्रुप। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अंसल एपीआई ग्रुप के मालिक सहित तीन लोगों और कुछ अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह प्राथमिकी जगदीशपुरा थाने में एक पूर्व फौजी की पत्नी की शिकायत पर दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्हें सुशांत ताज सिटी टाउनशिप में एक ऐसा प्लॉट बेचा गया जो वास्तव में एक किसान का है और उस पर खेती हो रही है। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।
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सिकंदरा स्थित जेआर रॉयल विला निवासी सेवानिवृत्त फौजी योगेश शर्मा की पत्नी आशा रानी शर्मा ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया। बताया कि उनकी मुलाकात जनवरी 2014 में फुलट्टी निवासी बल्लभ कुमार शर्मा से हुई थी। उसने सुशील अंसल, प्रणव अंसल और अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कर्मचारियों व अधिकारियों से मिलाया था। आरोपियों ने अंसल एपीआई को देश का सबसे बड़ा रियल एस्टेट ग्रुप बताया और जगदीशपुरा के सदरवन गांव के पास सुशांत ताज सिटी नाम से विश्व स्तरीय टाउनशिप बनाने की जानकारी दी।

उनके लेआउट में आगरा विकास प्राधिकरण की मुहर दिखा कॉलोनी के अनुमोदित होने का दावा किया गया। 18 जनवरी 2014 को 10.50 लाख रुपये लेकर उन्हें 17 मार्च को ऑफर ऑफ पजेशन लेटर दिया गया। अन्य विकास और सुरक्षा जमा के नाम पर 2 लाख रुपये और लिए गए। इसके बाद बैनामा के लिए टरकाते रहे।
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प्लॉट की जगह हो रही थी खेती
जब अंसल एपीआई के लोगों से धोखाधड़ी की जानकारी हुई तो वह आगरा विकास प्राधिकरण पहुंचीं, वहां पता चला कि जो प्लॉट उन्हें बेचा गया था वह अंसल ग्रुप का नहीं है। वह जगह किसी चोखेलाल के नाम पंजीकृत है और वहां खेती हो रही है। कंपनी के कार्यालय पर जाने पर पता चला कि अब कंपनी का कोई अधिकारी यहां नहीं बैठता है।

पुलिस नहीं दर्ज कर रही प्राथमिकी
पीड़िता के वकील पवन दीक्षित ने आरोप लगाया कि अंसल ग्रुप ने बिना जमीन खरीदे ही 300 से ज्यादा लोगों से धोखाधड़ी कर सौदा किया और करोड़ों की धोखाधड़ी की। मामले में पीड़ितों के लगातार चक्कर लगाने, कई पीड़ितों की शिकायत पर एक प्राथमिकी दर्ज की। अब तक 50 से ज्यादा पीड़ितों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी है। कुछ मामलों में अभी अधिकारियों के आदेश पर भी जांच चल रही है। पुलिस के कार्रवाई नहीं करने से पीड़ितों को बाद में समझौते पर विवश होना पड़ रहा है।
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