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खुद का घर बेच, किराए के मकान में परिवार

Sun, 19 Jun 2016 12:36 AM IST
अमर उजाला आगरा
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पलायन - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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 आवास विकास सेक्टर आठ में किराए के मकान में रह रहे टेकचंद इसरानी का परिवार अपना पैतृक मकान बेचकर काफी दुखी है। कहते हैं, आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नहीं कि तीनों बेटियों के पढ़ाई खर्च के अलावा मकान का किराए भी दे सकें। अब उनकी शादी की चिंता भी सता रही है। बोले कि कुछ दबंगों से तंग आकर लाखों रुपये की कीमत का मकान काफी कम दामों पर बेचना पड़ा था।
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टेकचंद की पत्नी रेखा का कहना है कि उनका बिल्लोचपुरा में मकान था। पहले तो वहां माहौल अच्छा था। मगर, समय के साथ परिस्थितियां बदलती गईं। आसपास के सभी हिंदू मकान बेचकर चले गए। रेखा का कहना है कि सभी की अपनी-अपनी वजह थीं। मगर, इन परिवारों के जाने से जब हिंदू परिवारों की संख्या कम रह गई तो क्षेत्र के दबंग तंग करने लगे। रेखा का कहना है कि जब पड़ोसी ने मकान बेच दिया तो उनसे नहीं रहा गया। आए दिन झगड़े बढ़ते जा रहे थे। कभी उनके घर के सामने गंदगी फेंक दी जाती तो कभी उनकी बेटियों के सामने गंदी-गंदी गालियां दी जातीं, ऐसी परिस्थितियों में मकान बेचना ही उचित समझा। टेकचंद के बेटे विजय का कहना है कि तंग आकर फरवरी 2014 को 241 वर्ग गज में बना मकान महज 10 लाख रुपये में ही बेचना पड़ा।
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