भैरों बाजार स्थिति केनरा बैंक की बिल्डिंग गिरने के बाद शनिवार को मलबा हटाटी मशीन। अमर उजाला
आगरा। भैरों बाजार में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे निर्माण ने सिस्टम की पोल खोल दी है। निर्माणाधीन कृष्णा मेट्रो मॉल के लिए बिल्डर ने 25 फीट से ज्यादा गहरा बेसमेंट खोद डाला। नतीजा यह हुआ कि पड़ोस में खड़ी दशकों पुरानी इमारत ढह गई। खास बात यह है कि खुदाई से निकली हजारों मीट्रिक टन मिट्टी का क्या हुआ, इस पर खनन विभाग और आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के पास कोई जवाब नहीं है।
नियमों के मुताबिक, शहर में खुदाई और निर्माण की निगरानी एडीए को करनी थी, लेकिन इंजीनियरों ने मौके पर जाकर गहराई नापने की जहमत तक नहीं उठाई। कागजों पर नक्शे के अनुसार निर्माण का दावा कर अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। हादसे के बाद एक रिपोर्ट बनाकर जारी की लेकिन उसमें भी नियमानुसार निर्माण का ही दावा किया। हालांकि इस बात पर कोई जवाब नहीं दिया कि जब ध्वस्त हुई बिल्डिंग भी उसी निर्माणाधीन स्थल का हिस्सा थी और उसे भी नियमानुसार ध्वस्त किया जाना चाहिए था तो उसे गिरवाया क्याें नहीं गया।
वहीं, खनन विभाग को यह तक नहीं पता कि वहां हुई खुदाई के बाद मिट्टी का क्या हुआ। वरिष्ठ खनन अधिकारी मिथिलेश कुमार पांडेय ने बताया कि बिल्डर ने दो बार मिट्टी खोदने की अनुमति ली थी। चूंकि मिट्टी पर कोई रॉयल्टी (राजस्व) नहीं लगती इसलिए विभाग को इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि वह हजारों ट्रॉली मिट्टी कहां खपाई गई। यानी विभाग ने परमिशन तो दी लेकिन उस खुदाई के बाद होने वाले जान-माल के खतरे और अवैध मिट्टी व्यापार से आंखें फेर लीं।
लाखों की मिट्टी की होगी तलाश
जानकारों की मानें तो 25 फीट गहरे गड्ढे से निकली मिट्टी की कीमत लाखों में है, जिसे कहां ठिकाने लगाया गया, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल पुलिस निर्माण के दौरान मानकों के पालन और मिट्टी खनन जैसे विभिन्न मुद्दों पर जांच शुरू कर चुकी है।