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...तो क्या कागज पर चल रहे हैं 107 कालेज

Sat, 20 Feb 2016 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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परीक्षा विभाग के वरिष्ठ सहायक सतेंद्र की हत्या से डा. भीमराव अंबेडकर प्रशासन की कारगुजारी की पोल खुल रही है। आरोपी का एक कालेज पुलिस को धरातल पर ही नहीं मिला। ऐसे में विश्वविद्यालय से जुड़े 107 कालेजाें के अस्तित्व पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। प्रश्न, इसलिए भी कि इन कालेजों ने भारत सरकार के प्रकल्प आल इंडिया एजूकेशन सर्वे के लिए अपना विवरण आनलाइन नहीं किया है, जबकि इसकी अंतिम तिथि 15 जनवरी थी।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय, डिग्री कालेजों के शैक्षणिक स्तर का आकलन कर रहा है। इसमें कालेज की इमारत, पता, शिक्षक और उनकी योग्यता, कोर्स, फीस, छात्र, लैब जैसी जानकारी साक्ष्य के साथ देनी थी। देशभर में चल रहे इस अभियान में प्रदेश के कालेजों की हालत सबसे खस्ता है। 2014-15 में विश्वविद्यालय से संबद्ध 622 कालेजों में 515 कालेजों ने विवरण आनलाइन कर दिया है। 107 कालेज जानकारी देने से बच रहे हैं। इसमें 85 कालेज एटा, मैनपुरी, शिकोहाबाद और इटावा क्षेत्र के हैं। बताया जाता है कि चंद कमरों के कालेज में तमाम कोर्स चल रहे हैं। तीन साल में होने वाले विश्वविद्यालय स्तरीय भौतिक सत्यापन में भी सब कुछ ‘ओके’ दर्शा दिया जाता है। कुलपति प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल ऐसे कालेजों की जांच शासन स्तर पर करवाने की बात कह रहे हैं।

जान बचाकर भागे थे कुलपति
मैनपुरी, एटा, इटावा क्षेत्र के कालेजों में मुख्य परीक्षा में जमकर नकल होती है। 2013 में मैनपुरी के एक कालेज में तत्कालीन कुलपति प्रो. डीएन जौहर पर बंदूकधारियों ने हमला बोल दिया था। कुलपति मुश्किल से जान बचाकर भागे और डीएम के निवास पर शरण ली। मामला शासन तक पहुंचा, लेकिन हैरत की बात है कि 2014 की मुख्य परीक्षा में फिर से ये कालेज सेंटर बना था।
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