रेडियो डायग्नोसिस यूनिट लगभग तैयार, अगले महीने से सीटी-स्कैन
एमआरआई की मिलेगी सुविधा, यूजी-पीजी छात्रों को टीचिंग में राहत
एसएन मेडिकल कालेज जल्द ऐसे कालेजों में शुमार होने जा रहा है, जहां एमआरआई की सुविधा होगी। इसके लिए एसएन में अलग से रेडियो डायग्नोसिस विभाग बनाया गया है। तीन मंजिला इमारत लगभग तैयार है। इसमें 1.5 टेस्ला एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) और 64 स्लाइस सीटी (कंप्यूटराइज्ड ट्रॉमोग्राफी) स्कैन मशीनें लगाई जाएंगी। इनकी खरीद हो चुकी है, कंपनी के विशेषज्ञ नई इमारत में मशीनों को शिफ्ट कराने में लगे हैं। प्राचार्य डा. एसके गर्ग ने बताया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह से मरीजों को सुविधा मिल सकेगी।
रियायती दर पर होगी जांच
दिमाग, तंत्रिका तंत्र, स्पाइन, हड्डियों के जोड़ जैसी बीमारियों की जांच में एमआरआई और सीटी स्कैन की जरूरत दिमाग, छाती, पेट और हड्डी रोग की बीमारियाें में होती है। इससे मर्ज की सटीक जांच होने पर इलाज में आसानी होती है। प्राइवेट में एमआरआई के लिए तीन से पांच हजार और सीटी स्कैन के लिए एक से पांच हजार रुपये खर्च करने होते हैं। यहां रियायती दर पर जांच होगी, कीमत सरकार तय करेगी। देखा जाए तो औसतन रोजाना यहां आने वाले 40-50 मरीजों को सीटी स्कैन और 30-40 मरीजों को एमआरआई की जरूरत पड़ती है।
टीचिंग और रिसर्च में मिलेगा फायदा
रेडियो डायग्नोसिस विभाग बनने से मेडिकल छात्रों को भी बड़ी राहत मिलेगी। अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट के छात्र एमआरआई की संचालन विधि, बीमारियों की जांच और रिपोर्टिंग जान सकेंगे। विभागाध्यक्ष डा. समरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि इसके माध्यम से रिसर्च भी हो सकेंगे। छात्र बीमारियाें की तह तक जाएंगे और रिसर्च कर प्रोजेक्ट वर्क तैयार करेंगे।
मैटरनिटी होम से बढे़गी सुविधा
एसएन में 100 बेड का मैटरनिटी होम बन रहा है। पांच मंजिला इमारत पर तेजी से कार्य चल रहा है। इसके बन जाने से स्त्री रोग एवं प्रसव विभाग को राहत मिलेगी। यहां आधुनिक मशीनों से लैस आईसीयू होगा, लेबर रूम होगा। चिकित्सकों के अलग केबिन होंगे। अल्ट्रासाउंड सेंटर की भी अलग से सुविधा होगी।
जंबो पैक, एमडी की पढ़ाई
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की इमारत भी तैयार है। नई ओपीडी के सामने इसकी तीन मंजिला इमारत बनी है। इसमें ब्लड बैंक शिफ्ट होगी। जंबो पैक जैसी सुविधा भी मिलेगी। सबसे बड़ी बात, यहां ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में एमडी की पढ़ाई हो सकेगी। ब्लड बैंक शिफ्टिंग के लिए केंद्रीय औषधि आयुक्त की टीम भी सर्वे कर चुकी है।