हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अमृत गोयल ने बताया कि हाथरस और आगरा के 65 और 70 साल के दो मरीजों के गिरने से कूल्हे चोटिल हो गए। जांच करने पर आधे कूल्हे क्षतिग्रस्त मिले। इसमें एंटीरियर हिप एप्रोच तकनीक का उपयोग किया। इसमें जांघ के रास्ते से क्षतिग्रस्त आधे कूल्हे को बदला गया। इस तकनीक में मांसपेशियों को काटने की जरूरत नहीं पड़ती है। छोटा चीरा लगाकर मांसपेशियों को अलग कर सर्जरी की जाती है। मरीज को दर्द कम होने के साथ कूल्हा जल्दी खराब होने का खतरा भी कम होता है।
रक्तस्राव बेहद कम होने से मरीज 24 घंटे में ही चलने लगे हैं। एक मरीज के ऑपरेशन में घंटा भर का समय लगा। शुक्रवार को दोनों मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। सामान्य विधि से कूल्हे के पीछे से सर्जरी करनी पड़ती है। इसमें मांसपेशियों को काटने से रक्तश्राव अधिक होता है। ऐसी स्थिति में सप्ताह भर में मरीज चलने की स्थिति में आता है। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि एसएन में जटिल ऑपरेशन भी निशुल्क हो रहे हैं। निजी अस्पताल में इसका 2 से ढाई लाख रुपये का खर्चा आता है।