दो जूनियर डाक्टरों की पिटाई करने का गुनाह तो तीन ट्रकों में आए 15-20 लोगों ने किया, लेकिन इसकी सजा भुगतनी पड़ी बेचारे मरीजों को। एक के तो प्राण ही निकल गए। कई की जान पर बन आई है। तड़पते मरीजों को देखकर भी डाक्टरों का दिल नहीं पसीजा। उन्होंने गुरुवार रात से शुक्रवार रात तक सिर्फ और सिर्फ हमलावरों की गिरफ्तारी की बात की। हमलावरों कई सैन्य वर्दीधारी फौजी भी बताए जा रहे हैं।
हड़ताली डाक्टरों ने पर्चा काउंटर नहीं खुलने दिया। ओपीडी बंद रखी। ऑपरेशन थियेटर में एक भी ऑपरेशन नहीं किया गया। पैथोलॉजी जांच भी नहीं होने दी गई। एक्स-रे रूम खुला ही नहीं। अल्ट्रासाउंड कक्ष खुला था। इसमें मरीज पहुंचे, लेकिन डाक्टरों ने उन्हें बाहर कर दिया। इमरजेंसी में रोजाना 60-70 मरीज आते हैं।
शुक्रवार को एक भी भर्ती नहीं किया गया। पूरी इमरजेंसी में सुबह से रात तक सन्नाटा पसरा रहा। ओपीडी में 1000-1200 मरीज आते हैं। इतने ही आए थे लेकिन डाक्टरों ने एक को भी नहीं देखा। सभी वापस गए। उपचार न मिलने पर आईसीयू में भर्ती मरीजों में से भी कई प्राइवेट हॉस्पिटल चले गए। जो मजबूरी में रह गए, उनकी जान संकट में रही।
सैफई की शारदा देवी दर्द से कराहती रही। उनके कूल्हे में जख्म था। बुधवार को ड्रेसिंग करने के बाद उसे कोई देखने नहीं आया। उनके बेटे सुमित ने बताया कि ऐसा पता होता तो यहां नहीं आते।
- फीरोजाबाद के चंद्रप्रकाश का अपेंडिक्स का आपरेशन होना था। दर्द के मारे बुरा हाल था। उनके पिता उदयवीर ने बताया कि वे उसे इमरजेंसी लेकर आए थे , लेकिन बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद अंदर हॉस्पिटल में गए, लेकिन वहां भी हड़ताल थी।
एटा के वकील खान अपने आठ दिन का बच्चा लेकर इमरजेंसी दौड़े आए। यहां इलाज नहीं मिला। मां अफरोज डाक्टरों के आगे गिड़गिड़ाई , लेकिन कोई नहीं पसीजा।
- धनौली निवासी महावीर सिंह कैंसर से पीड़ित हैं। उनकी गुुरुवार को कीमो थैरेपी होनी थी। उनके पिरजनों ने बताया कि कैंसर विभाग में डाक्टर आए और सभी को बाहर कर दिया।
- मथुरा के गजेंद्र के डेढ़ साल का बच्चे को लंबे समय से बुखार था। इलाज की उम्मीद में यहां आया, लेकिन डाक्टर नहीं मिले। हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल के ले जाया गया।
जूनियर डाक्टरों की तीन मांग
1. डा. अश्वनी और डा. सरफराज पर हमला करने के सभी आरोपी गिरफ्तार किए जाएं।
2. गिरफ्तारी के बजाय हमलावरों से हाथ मिलाने वाले दरोगा मनोज सिंह को निलंबित किया जाए।
3. एसएन मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए जाएं।
आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। दरोगा पर कार्रवाई थाना की रिपोर्ट के आधार पर तय होगी - डा. प्रीतिंदर सिंह ( एसएसपी )
कब क्या
गुरुवार रात
09 बजे : रिटायर्ड सैन्यकर्मी उपचार न मिलने पर लौट गया।
12 बजे : दो जूनियर डाक्टरों पर हमला किया गया
01 बजे : डाक्टरों ने हड़ताल का एलान कर दिया
02 बजे : एसएन के सामने रोड जाम करने की कोशिश
02:15 बजे : पुलिस से डाक्टरों की झड़प हो गई
02:20 बजे : सेना पुलिस एसएन इमरजेंसी पहुंची
03:30 बजे : सीसीटीवी से एक हमलावर पहचाना गया
शुक्रवार सुबह
8:00 बजे : पुलिस अधिकारी इमरजेंसी पहुंची
9:00 बजे: जूनियर डाक्टर परिसर में जुटे
10:00बजे: ओपीडी और अन्य विभाग बंद कराए
10:30 बजे: प्राचार्य और डाक्टरों के बीच बैठक
11:30 बजे: डाक्टर धरने पर बैठ गए
दोपहर
12:30 बजे सेना, प्रशासन और प्राचार्य की बैठक
1:30 बजे: बैठक समाप्त, नतीजा नहीं निकला
2:00: एडीएम डाक्टरों के धरना स्थल पर पहुंचे
2:30 बजे : डाक्टरों के साथ अफसरों की फिर बैठक
3:30 बजे: बैठक समाप्त, इस बार भी बेनतीजा
शाम
06: 00 बजे : इमरजेंसी में पुलिस एक मरीज लेकर पहुंची
रात
11:00 बजे :जूनियर डाक्टर हड़ताल पर ही रहे
मेरे पति को डाक्टरों ने बहुत पीटा
आगरा। चार साल पहले सेना से सेवानिवृत्त्त हुए वैष्णोपुरम, कॉलोनी, ग्वालियर रोड निवासी बाहरी लाल मिल्ट्री हॉस्पिटल में भर्ती हैं। वह सफारी कार से बेटे बबलू के साथ गुरुवार रात को आगरा आ रहे थे। कार में खराबी होने पर सैंया में रुके थे। बबलू कार के लिए पानी लेने चला गया। कार से उतरकर खड़े थे कि तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। बबलू लौटकर आया तो पिता को घायल देखकर वह उन्हें एसएन इमरजेंसी लेकर पहुंचा। उनकी पत्नी शोभा ने बताया कि दिल्ली से कंप्यूटर हार्डवेयर का कोर्स कर रहा बेटा सुनील उन्हें एसएन ले गया था। वहां डाक्टरों ने ठीक से उपचार नहीं किया। इस पर सुनील ने सिर्फ इतना कहा था कि इलाज में लापरवाही न करो। इसी पर डाक्टरों ने सुनील को पीटा। इसके बाद उनके पति को बेरहमी से पीटा गया। कार की टक्कर से टांग में चोट लगी थी, डाक्टरों की पिटाई से हड्डी टूट गई। वे एमएम कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराने गई लेकिन पुलिस ने तहरीर तक नहीं ली। सुनील और छोटे बेटे बबलू को हिरासत में ले लिया है। गौरतलब है कि बाहरी लाल को एसएन से ले जाए जाने के बाद ही डाक्टरों पर हमला किया गया था।
खुद पिटे तो गिरफ्तारी, हमारे लिए जांच
आगरा। एसएन कालेज के कर्मचारियों ने एसएन-प्रशासन पर कर्मचारियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। कर्मचारी अध्यक्ष सुरेंद्र यादव का कहना है कि मेडिकल छात्रों ने वार्ड ब्वाय को पीटा, जिसका साक्ष्य सीसी कैमरे में है, उस पर सभी ने आंख मूंद लीं और जांच कराई जा रही है। वहीं डाक्टरों की पिटाई पर एसएन प्रशासन भी उनके साथ आ गया और गिरफ्तारी पर अड़े हैं। आरोपी मेडिकल छात्रों की गिरफ्तारी के लिए डीएम के सामने मांग रखेंगे।
पुलिस की लापरवाही से बिगड़े हालात
प्रशासन के अधिकारी रात में नहीं पहुंचे एसएन
एसएन मेडिकल कॉलेज में गुुरुवार रात के बाद शुक्रवार को दिन भर चले बवाल के पीछे पुलिस की लापरवाही मानी जा रही है। अगर रिटायर्ड सेन्यकर्मी के साथ डाक्टरों के विवाद के समय ही पुलिस हरकत में आ जाती तो ऐसी नौबत ही न आती। एसएन में पुलिस चौकी है। इसके बावजूद हंगामे पर शुरू में ध्यान नहीं दिया गया।
जब गुस्से से भरे 15-20 लोग ट्रकों से पहुंचे, तब भी पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी। आस पास के थानों की पुलिस तब बुलाई गई, जब हमलावर जा चुके थे। इसके अलावा प्रशासन ने भी गंभीरता नहीं दिखाई। रात में कोई अधिकारी एसएन नहीं पहुंचा। सुबह को एडीएम सिटी पहुंचे लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। सेना के अधिकारियों के साथ रात में ही मीटिंग करके समस्या का समाधान करने का प्रयास नहीं किया गया।
सैन्य अधिकारियों ने भी देखे फुटेज
आगरा। हमलावरों में कुछ फौजी बताए जा रहे हैं। इसके चलते सेना के अधिकारी गंभीरता दिखा रहे हैं। रात में ही सेना पुलिस एसएन पहुंच गई। सुबह को भी वही रहीं। इसके बाद सेना के अधिकारी लगातार एसएन में डटे रहे। इतना ही नहीं। पुलिस के साथ सीसीटीवी फुटेज भी देखे। माना जा रहा है कि सेना पुलिस आरोपियों की तलाश में थाना पुलिस की मदद करेगी। इसके अलावा सेना के अफसरों ने पुलिस, प्रशासन और एसएन मेडिकल के जिम्मेदार अधिकारयिों के साथ क ईबार मीटिंग कर विवाद का हल निकालने का प्रयास भी किया।
बार बार हो रहा एसएन में बवाल
आगरा। पिछले सप्ताह की ही बात है जब वार्ड ब्वाय के साथ मारपीट की गई। आरोप जूनियर डाक्टरों पर लगा। खूब हंगामा हुआ। चिकित्सकीय सेवाएं प्रभावित रही। इसके बाद अब फिर से बवाल हो गया। इससे पहले भी एसएन में हंगामा होता रहा है। कभी उपचार न मिलने पर तीमारदार भड़क जाते हैं तो कभी डाक्टरों की लापरवाही से मरीज की जान ही चली जाती है। एक बार तो तीन बच्चे ऑक्सीजन न मिलने से मर गए थे। काफी हंगामा हुआ था। डाक्टरों और कर्मचारियों का विवाद भी कई बार सामने आ चुका है यहां पर।
दिन भर हंगामा करते रहे जूनियर डाक्टर
हड़ताली डाक्टरों को मनाने की खूब कोशिश की गई। प्राचार्य ने बात की। एडीएम सिटी ने समझाया। एसपी सिटी ने कहा कि हड़ताल न करो। लेकिन नहीं माने। बोले, सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते। अगर सुरक्षित नहीं है, तो उपचार कैसे करेंगे। यह पहली बार नहीं है, कई बार हो चुका है। डाक्टरों ने प्राचार्य दफ्तर के सामने धरना दिया। नारेबाजी की। हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। इस पर प्राचार्य ने सीनियर डाक्टरों से कहा कि वे उपचार में लगें। उनके शीतकालीन अवकाश भी रद्द कर दिए गए हैं। लेकिन परेशानी यह आ रही है कि ज्यादातर सीनियर डाक्टर जूनियर का साथ दे रहे हैं। खुलकर सामने नहीं आए हैं लेकिन दबी जुबान में कह रहे हैं कि सुरक्षा का सवाल सभी के सामने है।
सीसीटीवी फुटेज से की गई हमलावरों की पहचान
15-20 के खिलाफ केस दर्ज, दो आरोपी हिरासत में लिए गए
आगरा। एसएन मेडिकल कालेज इमरजेंसी में गुरुवार रात दो जूनियर डाक्टरों पर जानलेवा हमले में पुलिस ने शुक्रवार को एक आरोपी को हिरासत में ले लिया। सीसीटीवी फुटेज से भी उसकी पहचान हो गई। फुटेज से और भी कई हमलावर पहचान लिए गए हैं। पुलिस अब अन्य आरोपियों की धरपकड़ के प्रयास में लगी है।
बता दें, गुरुवार रात को मरीज का इलाज कराने आए लोगों ने जूनियर डाक्टर अश्विनी, सरफराज और वार्ड ब्वाय जसवंत के साथ मारपीट की थी। इस मामले में एसएन मेडिकल कालेज के सीएमओ डा. सौरभ प्रकाश शर्मा ने अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराया।
इसमें लिखा है कि आकस्मिक विभाग के कमरा नंबर 115 में घुसकर डाक्टर और वार्ड ब्वाय के साथ 15-20 लोगों ने मारपीट की। मरीजों के तीमारदारों ने रोकने का प्रयास किया तो उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया। इसमें कुछ लोग सेना की वर्दी पहने थे। मारपीट के बाद सभी तेजी से भाग निकले। इस दौरान कर्मचारियों ने एक वाहन का नंबर नोट कर लिया।
एसओ ने बताया कि मुकदमा जानलेवा हमला, मारपीट, बलवा, सरकारी काम में बाधा की धारा और 3(क) मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। मिलट्री हास्पिटल से मरीज की पहचान ग्वालियर निवासी बहारी लाल (58) के रूप में हुई। मरीज को शहीद नगर स्थित उपाध्याय हास्पिटल में भर्ती कराने की जानकारी पर पुलिस वहां पहुंच गई। यहां मरीज की पत्नी से बात की गई। शुक्रवार दोपहर मरीज के बेटे बबलू और सुनील को पकड़ लिया। इमरजेंसी के गेट पर लगे सीसीटीवी फुटेज में बबलू साफ नजर आ रहा है। वह दिल्ली मेें सिविल सर्विसेज की कोचिंग करता है। उससे पूछताछ की जा रही है, जिससे अन्य आरोपियों की भी पहचान हो सके।